छह PCS अफसरों का तबादला, सुशील प्रताप सिंह पर शासन ने जताया पहले से ज्‍यादा भरोसा, दी LDA सचिव की जिम्‍मेदारी

सुशील प्रताप सिंह
सुशील प्रताप सिंह। (फाइल फोटो)

आरयू ब्‍यूरो, लखनऊ। उत्‍तर प्रदेश में गुरुवार रात छह पीसीएस अफसरों का तबादला कर दिया गया है। इस तबादले में विवेक श्रीवास्‍तव के ट्रांसफर के बाद करीब 15 दिनों से खाली चल रही लखनऊ विकास प्राधिकरण के सचिव जैसी महत्‍वपूर्ण कुर्सी को भी अधिकारी मिल गया है।

शासन ने भातखंडे संस्‍कृति विश्‍वविद्यालय के कुलसचिव व संस्‍कृति निदेशालय निदेशक के पद पर तैनात सुशील प्रताप सिंह पर पहले से ज्‍यादा भरोसा जताते हुए एलडीए सचिव बनाया है। जबकि एलडीए के संयुक्‍त सचिव अतुल कुमार को प्राधिकरण से हटाते हुए सुशील प्रताप सिंह की जगह भेज दिया गया है।

इसी क्रम में उपजिलाधिकारी बदायूं राजेश कुमार सिंह को अपर जिलाधिकारी कानपुर नगर में तैनाती मिली है, जबकि एडीएम गोण्‍डा संजय कुमार सिंह को उपनिदेशक युवा कल्‍याण एवं प्रांतीय रक्षक दल बनाया गया है। झांसी नगर मजिस्‍ट्रेट प्रमोद झा को संजय कुमार सिंह की जगह गोण्‍डा भेजा गया है। इसके अलावा प्रमोद झा की जगह अब उपजिलाधिकारी कुशीनगर योगेश्‍वर सिंह जिम्‍मेदारी संभालेंगे।

भूमि अर्जन में निभा चुके है महत्‍वपूर्ण भूमिका

सुशील प्रताप सिंह पहले संयुक्‍त सचिव के तौर पर एलडीए में तैनात रह चुके हैं। कुछ समय पहले तक अपनी तैनाती के दौरान सुशील प्रताप ने अनंत नगर, आइटी सिटी, वेलनेस सिटी, वरुण विहार व नैमिष नगर जैसी बड़ी योजनाओं की जमीन पर शुरूआत करने में अहम भूमिका निभायी थीं। माना जाता है कि इन योजना के लिये भूमि अर्जित करने में एलडीए वीसी प्रथमेश कुमार के बाद सबसे महत्‍वपूर्ण रोल सुशील प्रताप सिंह का ही था। भूमि अर्जन के दौरान किसानों से नर्मी और नटवरलाल व रंगबाजों से सख्‍ती से निपटने के चलते वीसी भी सुशील प्रताप पर भरोसा जताते थे। कहा जा रहा इन्‍हीं बातों को देखते हुए नैमिष नगर व वरुण विहार योजना की सीएम योगी आदित्‍यनाथ द्वारा इसी महीने की जाने वाली लॉन्चिंग से ठीक पहले उन्‍हें पहले से ज्‍यादा बड़ी जिम्‍मेदारी देते हुए शासन ने प्राधिकरण में सचिव के तौर पर तैनात किया है।

कार्यालय से जमीन तक किया नेतृत्‍व

वहीं गोमतीनगर समेत लखनऊ के अन्‍य इलाकों में दबंगों व रसूखदारों के अवैध कब्‍जे में दशकों से फंसी प्राधिकरण की अरबों रुपये की जमीन खाली कराने में भी फाइलों को समझने से लेकर मौके पर पहुंचकर अवैध कब्‍जा हटाने वाले कई  अभियानों का नेतृत्‍व भी सुशील प्रताप ने किया था।

काम से बनी तेजी के सा‍थ ईमानदारी की छवि

तेज तर्रार पीसीएस अफसर होने के बाद भी खरबों रूपये की जमीन अर्जित कराने से लेकर एलडीए के सबसे बदनाम अवैध निर्माण को रोकने वाले प्रवर्तन के जोनल अधिकारी व विहित प्राधिकारी की जिम्‍मेदारी संभालने के दौरान भी सुशील प्रताप सिंह पर भ्रष्‍टाचार का आरोप नहीं लगना भी उन्‍हें एलडीए के अधिकतर अफसरों से अलग पहचान देता है। हालांकि एलडीए की दूसरे नंबर की कुर्सी पर बैठने के बाद अब प्राधिकरण में जड़ जमाकर करप्‍श्‍न का कॉकस चलाने वाले सिंडिकेट से निपटना सुशील प्रताप सिंह के लिये भी किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं होगा।

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