आरयू ब्यूरो,
लखनऊ। राजधानी वासियों के साथ ही लखनऊ विकास प्राधिकरण के लिए सिरदर्द बन चुके अवैध निर्माण पर लगाम लगाने के लिए अब एलडीए ने एक बार फिर नए सिरे से कमर कसना शुरू कर दिया है। अवैध निर्माण सील होने के बाद भी मनमानी और इंजीनियरों की शह के चलते निर्माण होने की शिकायत पर एलडीए सचिव ने अवैध निर्माण पर नकेल कसने के साथ ही उसे कराने वालों को सामाजिक रूप से घेरने के लिए रेड मार्किंग कराने का खाका खीचा है।
लाल पेंट से लिखा जाएगा ये निर्माण अवैध है
अवैध निर्माण में आगे निर्माण न हो सके इसके लिए अब सील हो चुके भवनों पर एलडीए लाल पेंट से बड़े-बड़े अक्षरों में लिखवाएगा कि यह अवैध निर्माण है, इसे लखनऊ विकास प्राधिकरण द्वारा सील किया जा चुका है।
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इसकी प्लानिंग करने वाले एलडीए सचिव एमपी सिंह का कहना है कि अवैध निर्माण सील हो जाते है और आसपास वालों को भी नहीं पता चल पाता। इसकी वजह से निर्माण सील होने के बाद भी निर्माणकर्ता पर कोई खास फर्क नहीं पड़ता है, लेकिन दूरे से ही नजर आने वाले रंग और बड़े शब्दों में एलडीए की कार्रवाई की बात अवैध निर्माण पर लिखी होने से एक तरह से उसपर सामाजिक प्रेशर आ जाएगा। वहीं निर्माणकर्ता किसी को धोखे में रखकर अवैध निर्माण बेच भी नहीं सकेगा।
मिटाने पर होगी कड़ी कार्रवाई
सचिव ने कहा कि अवैध निर्माण खुद से तोड़ने का निर्माणकर्ता को पूरा मौका दिया जाएगा, लेकिन अपनी गलती सुधारने की जगह बिल्डिंग से एलडीए की सूचना मिटाने की कोशिश की तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। साथ ही अवैध निर्माण पर निगांह रखने वाले इंजीनियर और एलडीए कर्मचारी भी कार्रवाई की जद में आएंगे।
अधिकारियों ने पहले भी की है कोशिश, इंजीनियर की फौज आज तक बनी हैं असहाय
बताते चलें कि हाल ही चार्ज संभालने वाले एलडीए सचिव एमपी सिंह से पहले भी कई अफसर एलडीए को अवैध निर्माण रोकने में नाकाम होने या फिर अवैध निर्माण कराने के दाग से मुक्ति दिलाने के रास्ते पर कदम बढ़ा चुके हैं। फिर चाहे विजय खण्ड को मॉडल कॉलोनी बनाने का प्लॉन हो या फिर चिन्हित भवनों से पार्किंग खाली कराने की योजना एलडीए अभी तक इन जैसे दर्जनों मसलों पर फेल होकर जनता को राहत दिलाने में नाकाम ही रहा है।
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वहीं पिछली सपा सरकार में जहां दो अधिशासी अभियंता अवैध निर्माण रोकने में नाकाम थे। वहीं अब योगीराज में एलडीए के प्रभारी चीफ इंजीनियर समेत आधा दर्जन अधिशासी अभियंता व अन्य एई व जेई की लंबी फौज भी खुद को अवैध निर्माण के सामने असहाय होने का रोना रो रही है। कुल मिलाकर नवागत सचिव की प्लानिंग को अवैध निर्माण कराने वाले पैंतरेबाज कहां तक चलने देते हैं यह आने वाले समय में साफ हो जाएगा।
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