विपक्ष के भारी विरोध के बीच लोकसभा से विकसित भारत-जी राम जी विधेयक पास

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लोकसभा में बिल का विरोध करता विपक्ष।

आरयू वेब टीम। विपक्ष के भारी विरोध के बीच लोकसभा ने गुरुवार को मनरेगा का नाम बदलने और योजना में कई बदलाव करने वाले विकसित भारत-जी राम जी विधेयक को मंजूरी दे दी। कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने यह विधेयक सदन में पेश किया था। मतदान के दौरान विपक्षी दलों ने जोरदार हंगामा किया और कई सांसदों ने बिल की कॉपी के कागज फाड़कर सदन में फेंके। हंगामे के चलते लोकसभा की कार्यवाही को शुक्रवार 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया गया।

विपक्षी दलों ने आरोप लगाया कि विधेयक पर चर्चा के लिए पर्याप्त समय नहीं दिया गया। कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने इसे मनरेगा को खत्म करने की साजिश बताया। विपक्ष के हंगामे पर प्रतिक्रिया देते हुए शिवराज चौहान ने कहा कि बिल फाड़ना गांधीजी की अहिंसा की नीति के खिलाफ है। वहीं लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि सदन में हंगामा नहीं, बल्कि जनता के मुद्दों पर चर्चा होनी चाहिए।

वहीं विधेयक के समर्थन में बोलते हुए शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि मनरेगा योजना भ्रष्टाचार का केंद्र बन चुकी थी और नए बदलावों से करप्शन पर लगाम लगेगी। मनरेगा से महात्मा गांधी का नाम हटाने के आरोपों पर उन्होंने कहा कि रामराज्य की कल्पना खुद गांधीजी की थी और बापू आज भी देशवासियों के दिलों में जीवित हैं। उन्होंने विपक्ष पर जनता की आवाज न सुनने का आरोप भी लगाया।

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इस विधेयक में अकुशल शारीरिक श्रम करने के इच्छुक वयस्क सदस्यों वाले प्रत्येक ग्रामीण परिवार के लिए अब सौ दिन के बजाय 125 दिनों के रोजगार की गारंटी दी गई है। बिल की धारा 22 के अनुसार, केंद्र और राज्य सरकारों के बीच फंड साझा करने का अनुपात 60:40 होगा। वहीं, पूर्वोत्तर राज्यों, हिमालयी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों (उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर) के लिए यह अनुपात 90:10 होगा। बिल की धारा छह राज्य सरकारों को एक वित्तीय वर्ष में कुल 60 दिनों की अवधि पहले से अधिसूचित करने की अनुमति देती है, जिसमें बुवाई और कटाई जैसे व्यस्त कृषि सीजन शामिल होंगे। इस घोषित अवधि के दौरान, इस बिल के तहत कोई भी काम शुरू या निष्पादित नहीं किया जाएगा।

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