इरफान सोलंकी को हाई कोर्ट से राहत, जमीन कब्जाने के मुकदमे की कार्यवाही पर लगा ब्रेक

इलाहाबाद उच्च न्यायालय

आरयू ब्यूरो, लखनऊ/प्रयागराज। उत्तर प्रदेश के कानपूर में सीसामऊ विधानसभा से समाजवादी पार्टी के पूर्व विधायक इरफान सोलंकी को इलाहबाद हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। हाईकोर्ट ने इरफान सोलंकी के खिलाफ चल रहे जमीन पर कब्जे और रंगदारी के एक महत्वपूर्ण मुकदमे की कार्यवाही पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। न्यायमूर्ति समीर जैन की एकल पीठ ने ये आदेश सोलंकी की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया।

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और रिकॉर्ड पर उपलब्ध दस्तावेजों का अवलोकन करने के बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पूर्व विधायक इरफान सोलंकी को तत्काल राहत दी। न्यायमूर्ति समीर जैन की एकल पीठ ने मामले की प्रकृति और मालिकाना हक पर उठ रहे गंभीर सवालों को देखते हुए, कानपुर की ट्रायल कोर्ट में चल रहे रंगदारी और जमीन कब्जे के मुकदमे की संपूर्ण कार्यवाही पर अगले आदेश तक रोक लगाने का निर्देश दिया।

इरफान के अधिवक्ता ने कोर्ट में तर्क दिया कि जिस जमीन को लेकर मुकदमा दर्ज किया गया है, वह जमीन शिकायतकर्ता विमल कुमार के नाम पर है ही नहीं और पूरा मामला राजनीतिक रंजिश के चलते दायर किया गया एक झूठा मुकदमा है। कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद ट्रायल कोर्ट में चल रहे मुकदमे की कार्यवाही पर अगले आदेश तक रोक लगाकर पूर्व विधायक को बड़ी राहत दी है।

पूर्व विधायक इरफान सोलंकी के अधिवक्ता उपेंद्र उपाध्याय ने हाईकोर्ट में पुरजोर तरीके से यह दलील दी कि वादी विमल कुमार ने राजनीतिक दुर्भावना के चलते सोलंकी पर झूठा मुकदमा दर्ज कराया है। अधिवक्ता ने कोर्ट के सामने यह तथ्य रखा कि विमल कुमार जिस जमीन पर अपने मालिकाना हक का दावा कर रहे हैं, वह जमीन वास्तव में उनके नाम पर है ही नहीं। उन्होंने बताया कि वादी का जमीन के मूल मालिक के साथ पहले से ही सिविल मुकदमा लंबित है। अधिवक्ता ने तर्क दिया कि जब वादी ही जमीन का मालिक नहीं है, तो जमीन पर कब्जे का आरोप पूरी तरह से निराधार है और यह मुकदमा केवल विधायक को परेशान करने की एक साजिश है।

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दरअसल कानपुर के जाजमऊ थाना क्षेत्र के दुर्गा विहार निवासी विमल कुमार ने 25 दिसंबर 2022 को पूर्व विधायक इरफान सोलंकी और उनके सहयोगियों, बिल्डर हाजी वसी, शाहिद लारी और कमर आलम के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। विमल ने आरोप लगाया था कि आरोपितों ने मिलकर जाजमऊ स्थित उनकी आराजी संख्या 963 (1000 वर्ग मीटर) पर जबरन कब्जा कर लिया

मुकदमे में इन सभी पर मारपीट, रंगदारी मांगने, धमकी देने और सार्वजनिक संपत्ति नुकसान निवारण अधिनियम के तहत कार्रवाई की मांग की गई थी। वादी ने ये भी आरोप लगाया था कि आरोपितों ने जमीन पर कब्जा करने के लिए फर्जीवाड़ा किया, जिसमें केडीए की आराजी संख्या 48 से संबंधित कागजातों और एक पुराने हाईकोर्ट के आदेश का गलत इस्तेमाल किया गया, जबकि उस आदेश में वादी की जमीन का कोई जिक्र नहीं था।

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