आरयू ब्यूरो, लखनऊ। यूपी विधानसभा चुनाव की जहां राजनीतिक दल तैयारियों में जुटें हैं। वहीं बसपा का पारिवारिक घमासान ही थमने नाम नहीं ले रहा। अपने बदलते फैसलों से लगातार बसपा सुप्रीमो मायावती समर्थको समेत यूपी की जनता को चौंका रही है। आकाश आनंद को बसपा से निकालने व ईशान आनंद को कोई जिम्मेदारी नहीं देने और उनके बहन को दीपिका आनंद को जिम्मेदारी देने के फैसले में मायावती ने फिर भारी बदलाव किया है।
आज सोशल मीडिया पर अपनी जमकर तारीफ करने के साथ ही मायावती ने आठ दिन पहले ही आकाश के साथ ही ईशान को भी कोई जिम्मेदारी नहीं देने की अपनी प्रतिज्ञा तोड़ते हुए ईशान को बसपा में जिम्मेदारी देने और आगे बढ़ाने की बात कही, जबकि उनकी बहन दीपिका आनंद के मामले में भी अपना फैसला बदलते हुए कहा है कि दीपिक भी शादी बाद बदल गयी तो इसलिए उसे भी बसपा में कोई जिम्मेदारी अब नहीं दी जायेगी।
यह रही मायावती की एक्स पर की गयी पोस्ट इसे धैर्य से पढ़ने के साथ समझें-
आज मेरा पुनः बसपा के लोगों से कहना है कि अगर राजनीति में कामयाब होना और समाज के लिए कुछ करना है तो मेरी तरह अपने भाई-बहिनों व रिश्ते-नातों के मोह से उठकर पूरी ईमानदारी व निष्ठा से कार्य करना है। इसीलिए बीएसपी के संस्थापक मान्यवर कांशीराम ने राजनीति में आने के बाद अपने सभी नजदीकी रिश्ते-नातों को राजनीतिक लाभ से हमेशा दूर रखा है। उन्हें केवल निःस्वार्थ भावना से पार्टी संगठन में कार्य करने की इजाजत दी। इतना ही नहीं उन्होंने पूरी ज़िन्दगी ख़ुद का परिवार ना बनाकर, ’बहुजन समाज’ के हित व कल्याण के लिए ही समर्पित की है।
भाई के विशेष आग्रह पर…
मायावती ने आगे अपनी तारीफ करते हुए कहा कि कांशीराम से प्रेरित हो मैंने भी उन्हीं के पदचिन्हों पर चलने का फैसला लिया और पूरी ज़िन्दगी ’बहुजन समाज’ के लिए समर्पित कर दी। लेकिन मैं एक लड़की होने की वजह से फिर मजबूरी में मुझे अपने किसी भाई-बहिन आदि को हमेशा साथ रखना पड़ा है, जिसके तहत ही मेरा छोटा भाई आनन्द कुमार काफी वर्षों से मेरी सेवा में कार्यरत है। और भाई के विशेष आग्रह पर इनके परिवार से मुझे इनके बड़े बेटे आकाश आनन्द को राजनीति में आगे करना पड़ा है।
बसपा में वापस लेना बहुत बड़ा विश्वासघात
अपने भतीजे पर आरोप लगाते हुए मायावती ने आगे कहा किआकाश की शादी के बाद से अब आकाश आनन्द का क़दम-क़दम पर ऐसा रवैया व गतिविधियां रहीं कि जिसकी वजह से अभी कुछ दिन पहले फिर से इनको पार्टी से अलग भी करना पड़ा है। अब वह अपने ससुर अशोक सिद्धार्थ के जंजाल में पूरी तरह फंस चुके हैं, जिसे अब पार्टी में वापस लेना यह पार्टी के लिए बहुत बड़ा विश्वासघात ही होगा, जो मैं यह पार्टी विरोधी ग़लत कार्य कदापि नहीं कर सकती हूं।
ऐसे में अब मैं आनन्द कुमार के परिवार में से किसको पार्टी में आगे करूं या ना करूं, यह मेरे लिए कुछ समय से काफी दुविधा बनी हुई है, जिस पर विराम देते हुए अब मैंने हर पहलू पर काफी गम्भीरता से सोच-विचार करने के बाद यह फैसला लिया है कि परिवार से ऐसे किसी को पार्टी में आगे किया जाये, जो आकाश के नक्शेकदम पर बिल्कुल भी ना चले।
बेटी का मामला भी आकाश की तरह निकला तो…
और जहां तक आगे चलकर, इनकी बेटी की मदद लेने का सवाल है तो इनकी शादी होने के बाद, फिर इनका मामला भी यदि आकाश आनन्द की तरह ही निकल गया तो यह भी पार्टी हित में सही नहीं होगा। ऐसी सम्भावना को भी ध्यान में रख बसपा हित में यही उचित होगा कि आकाश आनन्द व इनकी बहिन को भी अब पार्टी की कोई भी ज़िम्मेवारी देने से इन दोनों को एकदम दूर रखा जाये अर्थात् अब इनके इस फैसले में कोई भी फेरबदल नहीं किया जायेगा।
अपने बदले फैसले पर मायावती ने कहा कि आकाश व दीपिका की जगह आनन्द कुमार के परिवार से केवल ईशान आनन्द को ही बीएसपी में सम्मानजनक जिम्मेदारी देकर आगे किया जायेगा।
…तो ईशान को भी कर देंगे बसपा से बाहर
बसपा सुप्रीमो ने अपने आज के फैसले पर भी संदेह जताते हुए कहा कि ईशान का आकाश आनन्द व इनकी बहिन की तरह कभी भी कोई चक्कर नहीं रहेगा। अभी तक ऐसा ही लग रहा, आगे तो कुछ भी नहीं कहा जा सकता है। फिर भी यदि ईशान ने बसपा ऐसा कोई भी गम्भीर कृत्य किया तो फिर इनको भी पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया जायेगा, लेकिन तब ऐसी स्थिति में आनन्द कुमार के परिवार में से अन्य किसी भी सदस्य को पार्टी की कोई भी जिम्मेदारी नहीं दी जायेगी। बल्कि इनकी जगह बसपा में ही कार्यरत दलित वर्ग के किसी भी एक मिशनरी व वफादार कार्यकर्ता को ही आगे कर दिया जायेगा।
अपनी अगामी बैठक की जानकारी देते हुए मायवाती ने कहा कि देश व जनहित के ज़रूरी मुद्दों के साथ-साथ इस ख़ास मुद्दे को भी लेकर अगामी 23 सितंबर को बसपा की अत्यन्त ज़रूरी ऑल-इण्डिया की बैठक बुलाई है ताकि लोग अपनी पार्टी के काम में जी-जान से जुट जायें।
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मायावती ने आगे कहा कि अब मैं यही कहना चाहती हूं कि खासकर परिवार को लेकर पार्टी व मूवमेन्ट के हित में मैंने यह फैसला मान्यवर कांशीराम जी से प्रेरित होकर तथा परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर जी के भी लिखे गये एक पत्र से प्रभावित होकर लिया है, जिस पत्र का सारांश इस प्रकार से है:
बाबा साहब ने 23 फरवरी 1956 को 26 अलीपुर रोड, सिविल लाइन्स, नई दिल्ली से बम्बई में अपने पुत्र यशवन्त बी. अम्बेडकर को पत्र में लिखा है कि, मुझे तम्हें सूचित करना है कि श्री उपशम के कई पत्राचार मिले हैं कि तुम उन्हें बौद्ध भूषण प्रिन्टिंग प्रेस के एकाउण्टेन्ट व कैशियर के रूप में उनकी ड्यूटी नहीं करने दे रहे हो। तुम्हें ऐसा लगता है कि ऐसा करके तुम प्रेस अपने कब्जे में ले लोगे। मैं तुम्हें आगाह कर रहा हूं कि प्रेस पब्लिक प्रापर्टी है, ना तुम्हारा है और ना मेरा, और एक पब्लिक अकाउण्ट में किसी भी प्रकार की अनियमितता की अनुमति देना संभव नहीं है। तुम्हारा आचरण उचित नहीं रहा है…अगर तुमने मेरी अन्तिम व फाइनल निर्देश की परवाह नहीं कि तो फिर मैं तुम्हें प्रेस से निकाल-बाहर करूंगा और इस चेतावनी के नहीं मानने पर मैं आपके खिलाफ मुकदमा भी करूंगा।
मायावती ने अंत में कहा कि संक्षेप में मैं यही कहना चाहती हूं कि समस्त ’बहुजन समाज’ ही मेरा असली परिवार है तथा सत्ता की मास्टर चाबी के ज़रिये ही उन्हें ’शोषित से शासक वर्ग’ बनाकर उनका हित व कल्याण सुनिश्ति करना ही मेरा मिशनरी लक्ष्य व मेरी प्रतिज्ञा भी है, जिसके लिए मैं अपने भाई-बहिनों आदि के ख़िलाफ भी किसी भी हद तक जा सकती हूं, जैसाकि बाबा साहब ने उदाहरण पेश किया, यही मेरा भी संकल्प है।



















