आरयू ब्यूरो, लखनऊ। भारतीय किसान यूनियन बीआर अंबेडकर के अध्यक्ष दिग्विजय सिंह भाटी और उनके साथी मोहित जाटव की यूपी पुलिस हिरासत में बर्बरता से पिटाई का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। इस मामले पर विपक्ष ने एसएसपी मेरठ अविनाश पांडेय पर कार्रवाई की मांग को लेकर योगी सरकार को घेरा है। कांग्रेस, समाजवादी पार्टी व आजाद समाज पार्टी ने भी घटना पर सवाल उठाते हुए निष्पक्ष जांच और दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
यूपी के पूर्व सीएम अखिलेश यादव ने दिग्विजय भाटी का वीडियो सोशल मीडिया मंच एक्स पर साझा करते हुए भाजपा सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने लिखा, “किसान का अपमान, देश का अपमान है।” साथ ही अखिलेश ने आरोप लगाया कि भाजपा ने पूरे देश के किसानों को धमकाने का जो कुकृत्य किया है, वह अक्षम्य है। अखिलेश ने कहा कि उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार द्वारा किसान नेताओं पर थाने में कथित तौर पर थर्ड डिग्री की मार-पीट कर प्रताड़ित किया जाना दर्शाता है कि हार के डर से सरकार बौखलाई हुई है।
सपा अध्यक्ष ने भाजपा सरकार की किसान नीति पर भी सवाल उठाए और एमएसपी, खाद की उपलब्धता, कृषि उपज की खरीद, भूमि अधिग्रहण और किसान आंदोलन से जुड़े मुद्दों को उठाया। साथ ही कहा कि भाजपा और उसके सहयोगी सत्ता सुख में लीन रहकर किसानों पर अत्याचार कर रहे हैं। अखिलेश ने मामले की गहरी जांच, हर दोषी के खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई और बर्खास्तगी की मांग की।
‘जंगलराज’ का भयानक चेहरा: कांग्रेस
वहीं कांग्रेस ने भी सोशल मीडिया के जरिए योगी सरकार को घेरा। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि यूपी सरकार में लोकतंत्र और मानवाधिकार पूरी तरह ध्वस्त हो चुके हैं। मेरठ में भारतीय किसान यूनियन के नेता दिग्विजय भाटी के साथ पुलिस की कथित बर्बरता ‘जंगलराज’ का भयानक चेहरा है।
कांग्रेस के मुताबिक, पीड़ित किसान नेता ने आरोप लगाया है कि उन्हें बंद कमरे में घंटों बेरहमी से पीटा गया, थर्ड डिग्री टॉर्चर दिया गया और गानों पर जबरन नचाकर अपमानित किया गया। कांग्रेस ने भाटी के वीडियो का हवाला देते हुए कहा कि उनकी सूजी हुई आंख और गंभीर चोटें पुलिस की कथित कार्रवाई को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती हैं। पार्टी ने कहा कि बीजेपी सरकार का यह तानाशाही रवैया स्वीकार्य नहीं है।
चंद्रशेखर आजाद ने यूपी पुलिस पर उठाए सवाल
वहीं चंद्रशेखर आजाद ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि मेरठ में मोहित जाटव और दिग्विजय भाटी के साथ पुलिस हिरासत में हुई कथित बर्बरता कानून-व्यवस्था और पुलिस की जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े करती है। चंद्रशेखर ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को टैग करते हुए कहा कि ये पुलिसिंग नहीं, बल्कि वर्दी की ताकत का खुला दुरुपयोग और हिरासत में यातना है। किसी भी अधिकारी को कानून अपने हाथ में लेने का अधिकार नहीं है।
साथ ही उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार से तत्काल सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित कराने, पीड़ितों का स्वतंत्र मेडिकल परीक्षण कराने और आरोपों की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने की मांग की। नगीना सांसद ने कहा कि दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। चंद्रशेखर आजाद ने कहा कि वर्दी कानून से बड़ी नहीं है और आम नागरिकों की आवाज को पुलिसिया ताकत के बल पर दबाना किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग से भी मामले का संज्ञान लेने की मांग की।
ये है पूरा मामला
दरअसल दिग्विजय भाटी ने इंटरनेट पर प्रसारित वीडियो में तत्कालीन मेरठ एसएसपी अविनाश पांडेय और सिविल लाइंस थाने के प्रभारी अखिलेश गौड़ समेत पुलिसकर्मियों पर पिटाई करने का आरोप लगाया है। भाटी के मुताबिक, वह मोहित जाटव के साथ 19 अगस्त को एसएसपी कार्यालय में गैंगस्टर के एक मुकदमे में निष्पक्ष कार्रवाई की मांग को लेकर गए थे। उनका दावा है कि एसएसपी उस समय कार्यालय में मौजूद नहीं थे। कुछ देर बाद एसएसपी कार्यालय पहुंचे और सिपाही के माध्यम से उन्हें अंदर बुलाया गया।
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भाटी का आरोप है कि एसएसपी ने खुद उनकी पिटाई की गई। इसके बाद सिविल लाइंस इंस्पेक्टर अखिलेश गौड़ उन्हें और मोहित जाटव को पुलिस लाइन स्थित एसओजी कार्यालय ले गए, जहां दोनों के साथ पर मारपीट की गई। उन्होंने दावा किया कि बाद में उन्हें सिविल लाइंस थाने ले जाया गया। भाटी के अनुसार, आंखों से खून आने के बाद पुलिस ने आंख और दिमाग के चिकित्सकों को भी थाने बुलाया। वहीं अपनी हरकतों को लेकर अकसर विवादों में रहने वाले एसएसपी मेरठ अविनाश पांडेय को मेरठ से हटाते हुए डीजीपी कार्यालय से अटैच कर दिया गया है।




















