आरयू वेब टीम। पश्चिम बंगाल की पूर्व सीएम ममता बनर्जी को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने तृणमूल कांग्रेस के चार डेबिट-फ्रीज किए गए बैंक खातों को संचालित करने की याचिका खारिज कर दी है। साथ ही कोर्ट ने कलकत्ता हाईकोर्ट के उस आदेश में दखल देने से इनकार कर दिया है।
इस मामले की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति एम.एम. सुंदरेश और न्यायमूर्ति पीबी वराले की बेंच ने ममता बनर्जी की पार्टी को बड़ा झटका देते हुए याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि चूंकि चुनाव आयोग द्वारा पार्टी का चुनाव चिह्न फ्रीज किए जाने और खातों में मौजूद भारी-भरकम फंड का असली हकदार कौन है। ये सवाल अभी अदालत में विचाराधीन है, इसलिए वे इस मामले की गहराई में नहीं जाएंगे और कलकत्ता हाईकोर्ट से अनुरोध किया कि वह इसकी सुनवाई में तेजी लाए।
कलकत्ता हाईकोर्ट ने बीते 27 अगस्त को अपने आदेश में उन चार बैंक खातों को चलाने की अनुमति देने से साफ इनकार कर दिया था, जिनमें करीब 804 करोड़ रुपये जमा हैं। अदालत का मानना था कि ऐसी राहत देने से उसका वह पिछला आदेश कमजोर हो जाता, जिसमें पार्टी को केवल अपने रोजमर्रा के खर्चों को पूरा करने की सीमित छूट दी गई थी। टीएमसी चाहती थी कि इन बड़े खातों से जुड़े प्रतिबंधों को हटाया जाए, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के इस रुख के बाद पार्टी को फिलहाल कोई राहत मिलती नजर नहीं आ रही है।
दूसरी ओर, प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) इस पूरे मामले में मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल से जांच कर रहा है। ईडी का मुख्य आरोप है कि कोलकाता स्थित ‘केयरवेल एविगेशन’ के जरिए करीब 160 करोड़ रुपये के पार्टी फंड की हेराफेरी की गई है। इसी जांच के दायरे के तहत ईडी ने एचडीएफसी बैंक में टीएमसी के खातों पर भी शिकंजा कसा है, जिससे पार्टी की कानूनी मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं।
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सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा कि वह इस मामले के गुण-दोष में नहीं जाना चाहता और अनुच्छेद 136 के तहत अपनी असाधारण शक्तियों का इस्तेमाल करने के पक्ष में बिल्कुल नहीं है। शीर्ष अदालत ने कलकत्ता हाईकोर्ट से यह भी आग्रह किया है कि वह इस मामले की सुनवाई को जल्द से जल्द पूरा करे, ताकि स्थिति स्पष्ट हो सके।




















