आरयू ब्यूरो, लखनऊ। विकास की पहली शर्त सुरक्षा होती है, लेकिन 2017 से पहले न व्यक्ति सुरक्षित था और न ही परिवार ताे कैसे निवेश आएगा, लेकिन 2017 के बाद भारत की आत्मा उत्तर प्रदेश काे संजोने संवारने के लिए हमने वह सब कुछ किया जाे जरूरी था और ये परिणाम नौ साल में सबके सामने है। नौ साल में ये ओवरऑल परिवर्तन और परसेप्शन बदला इसके लिए कुछ सुधार किये गए।
यह भी पढ़ें- शिक्षामित्र-अनुदेशक, आंगनवाड़ी व आशा वर्करों का बढ़ेगा मानदेय, सीएम योगी ने की घोषणा
उक्त बातें लोकभवन में आयोजित एक समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को 50 क्यूआरटी वाहनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना कर कार्यक्रम को संबोधित कर कही। साथ ही योगी ने कहा कि उनकी सरकार में साल 2017 से 2022 के बीच उत्तर प्रदेश पुलिस के सकारात्मक कार्यों का परिणाम है कि साल 2017 से पहले के अराजक, बिगड़े, दंगाग्रस्त, कर्फ्यू ग्रस्त राज्य को सुरक्षित उत्तर प्रदेश के रूप में परिवर्तित कर एक अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया है और इसी कारण पहली बार काेई सरकार लगातार दूसरी बार सत्ता में आयी है।
कर्फ्यू ग्रस्त राज्य को सेफ यूपी में बदला
वहीं मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि पहली बार देखा गया कि लोकतंत्र में कानून-व्यवस्था चुनाव का मुद्दा बन सकता है और आजादी के बाद पहली बार कोई सरकार अपना पांच साल का कार्यकाल पूरा करने के बाद फिर से दुबारा सत्ता में आयी तो यह पुलिस के उसी प्रयास का परिणाम है, जो 2017 से 2022 के बीच उत्तर प्रदेश में पुलिस ने ऐसा कार्य किया कि वर्ष 2017 से पहले के एक अराजक, बिगड़े, दंगाग्रस्त, कर्फ्यू ग्रस्त राज्य को सेफ यूपी के रूप में बदल दिया।
विश्वास ही ट्रांसफारमेशन का कारण
उन्होंने अपनी सरकार में पुलिस में किए गए सुधार व उपलब्ध कराए गए संसाधनाें की चर्चा करते हुए कहा कि वर्ष 2017 में यूपी पुलिस के पास पीआरवी के कुल 9500 वाहन थे, आज उनकी संख्या प्रदेश में 15,500 से अधिक है। इसी प्रकार 2017 में टू व्हीलर की संख्या 3000 थी लेकिन आज इनकी संख्या बढकर 9200 से अधिक है। यह केवल संख्या नहीं है, इसने पुलिस के रिस्पॉन्स टाइम को न्यूनतम लाने में सफलता प्राप्त की है। अगर देखें तो आपातकालीन स्थिति में जितनी त्वरित कार्रवाई होगी वही विश्वास में बदलती है और यह विश्वास ही ट्रांसफारमेशन का कारण बनता है।
प्रधानमंत्री जी हमेशा कहते हैं…
मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि प्रधानमंत्री जी हमेशा कहते हैं कि मॉडल पुलिसिंग के लिए जो तीन महत्वपूर्ण स्तंभ हैं, उसमें इंफ्रास्ट्रक्चर, टेक्नोलॉजी और मोबिलिटी और इन तीनों का अपना महत्व है। उत्तर प्रदेश पुलिस बल का जो पहले बजट था, वह 2017 के पहले सांस अटकते-अटकते 16,000 करोड़ तक पहुंच पाता था और वह भी खर्च नहीं हो पाता था। वर्षों पहले जिले बने थे लेकिन जिला मुख्यालय नहीं, पुलिस लाइन नहीं, ऐसे में क्या पुलिस परिणाम देती? इतना ही नहीं पुलिस के पास पुराने असलहे, कोई सुविधा नहीं, अवस्थापना सुविधाएं जीरो, टूटे हुए बैरक में, टूटे हुए एज्बेस्ट्स शीट के नीचे रहने के लिए पुलिसकर्मी दिन भर की 12 घंटे की ड्यूटी के बाद जब आते थे। मौसम में सर्दी, गर्मी, बरसात में उस टूटे हुए खपरैल के नीचे उन्हें रहने के लिए मजबूर होना पड़ता था।
बन रहे मॉडल थाने
मुख्यमंत्री योगी ने अपने कार्यकाल में पुलिस संसाधनों के विस्तार की चर्चा करते हुए कहा कि आज मॉडल थाने बन रहे हैं, मॉडल फायर स्टेशन बन रहे हैं। उत्तर प्रदेश पुलिस बल की ट्रेनिंग की क्षमता 2017 में केवल 3000 ट्रेनिंग की क्षमता थी ऐसे में चिंता थी कि ट्रेनिंग कैसे दी जाएगी। नौजवान परेशान थे, क्योंकि वर्षों से भर्ती नहीं हो पाई थी और निष्पक्ष भर्ती तो एक प्रश्न बना हुआ था कैसे होगा। मेरे सामने समस्या थी कि हम 3000 से अधिक भर्ती एक बार नहीं कर सकते थे।
मालूम हो कि ये वाहन होंडा इंडिया फाउंडेशन की ओर से अपने कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (सीएसआर) फंड के तहत उपलब्ध कराए गए हैं। इस अवसर पर मुख्य सचिव एसपी गोयल, डीजीपी राजीव कृष्ण, होंडा इंडिया फाउंडेशन के वाइस चेयरमैन समेत शासन-प्रशासन के सभी प्रमुख अधिकारी उपस्थित रहे।


















