आरयू ब्यूरो, लखनऊ। किसी मुकदमें को जीतने से ज्यादा जरूरी न्याय मिलना है। जीवन में आत्ममंथन अत्यंत आवश्यक है। “क्या मेरी तैयारी पूरी थी? क्या मैंने मुकदमे में बहस सही से की?” जैसे सवाल खुद से पूछने की आदत सुधार की दिशा में पहला कदम है। यह कहना है देश के होने वाले चीफ जस्टिस का।
सुप्रीम कोर्ट के भावी चीफ जस्टिस सूर्यकांत शर्मा आज लखनऊ के डॉ. राम मनोहर लोहिया नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि हमारे लिए जीवन पद्धति का हिस्सा सत्य बोलो और धर्म की रक्षा करो है।
समारोह के दौरान जस्टिस सूर्यकांत ने छात्रों से अपने वकालत के दौर का अनुभव साझा किया। आगे कहा कि एक बार अतिआत्मविश्वास के कारण वह केस हार गए थे। उसके बाद से उन्होंने हर केस के लिए नोटबुक रखना शुरू किया ताकि हर गलती से सीख ली जा सके। उन्होंने नए विधि स्नातकों को अतिआत्मविश्वास से बचने और विनम्रता बनाए रखने की सलाह दी।
वहीं दीक्षांत समारोह में सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस विक्रम नाथ ने विद्यार्थियों को तीन मंत्र दिए मेहनत, ईमानदारी और खुशमिजाजी। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति इन तीन बातों का पालन करता है, वह जीवन में अवश्य सफल होता है।
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समारोह में इलाहाबाद हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश अरुण कुमार भंसाली, उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय, विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह और कुलपति प्रो. अमरपाल सिंह भी मौजूद रहे। इस अवसर पर विश्वविद्यालय की विभिन्न पाठ्यक्रमों के 309 विद्यार्थियों को उपाधियां और 21 मेधावियों को स्वर्ण, रजत, कांस्य व स्मृति पदक प्रदान किए गए। विशेष स्वर्ण पदक पाने वालों में प्रदीप कुमार अग्रवाल, मुस्कान शुक्ला, दर्शिका पांडेय, धीरज दिवाकर और अभ्युदय प्रताप शामिल हैं। इस वर्ष 24 पीएचडी उपाधियां भी प्रदान की गईं।


















