आरयू ब्यूरो, लखनऊ। प्रयागराज माघ मेले के दौरान शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के अपमान का मामला लगातार तूल पकड़े हुए है। अब शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद मामले पर उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने बड़ा बयान दिया है। ब्रजेश पाठक ने कहा कि ‘बटुकों की चोटी नहीं खींचना चाहिए था। ये महाअपराध की श्रेणी में आता है, जिसने भी ऐसा किया है उसे पाप लगेगा। इस मामले में जो भी दोषी है उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।
वहीं डिप्टी सीएम ने कहा कि अगर पुलिस कर्मियों को बल का प्रयोग करना पड़ रहा था तो लाठीचार्ज करते लेकिन, चोटी पकड़कर खींचना महाअपराध है। ये स्वाकार्य नहीं है, देखिएगा जिन्होंने ये किया है, उन्हें महापाप लगेगा। भगवान के बही खाता में सब कुछ दर्ज हो रहा है। सारा हिसाब होगा।
ब्रजेश पाठक ने ये बातें एक कॉन्क्लेव में कही, हालांकि डिप्टी सीएम ने इस दौरान शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद का नाम नहीं लिया। उनसे माघ मेले में हुए विवाद पर मीडिया ने प्रश्न पूछा था। डिप्टी सीएम का हालिया बयान ब्राह्मण समाज की नाराजगी के बीच सियासी डैमेज कंट्रोल के रूप में देखा जा रहा है।
इससे पहले योगी आदित्यनाथ ने 13 फरवरी को विधानसभा में इस विवाद पर अपनी बात रखी। साथ ही कहा कि हर कोई स्वयं को शंकराचार्य घोषित नहीं कर सकता और कानून से ऊपर कोई नहीं है, वे खुद भी नहीं। उनका कहना था कि यदि विपक्ष के लोग किसी को पूजना चाहते हैं तो यह उनका निर्णय है, लेकिन व्यवस्था और कानून का पालन सबको करना होगा।
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मुख्यमंत्री ने ये भी कहा कि माघ मेले में जिस विषय को मुद्दा नहीं बनाया गया था, उसे जानबूझकर विवाद का रूप दिया गया। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे कोई भी व्यक्ति खुद को मुख्यमंत्री या मंत्री घोषित कर पूरे प्रदेश में नहीं घूम सकता, उसी तरह हर पद की एक प्रक्रिया और व्यवस्था होती है।
साथ ही दोहराया कि सनातन परंपरा में शंकराचार्य का पद सर्वोच्च और पवित्र माना जाता है, लेकिन कानून-व्यवस्था सबके लिए समान हैं। माघ मेले में मौनी अमावस्या के दिन करोड़ों श्रद्धालु पहुंचे थे और सभी के लिए एक समान नियम लागू थे। उन्होंने कहा कि कानून सबके लिए बराबर है- चाहे वह आम नागरिक हो या मुख्यमंत्री।




















