इंपैक्ट समिट में बोले पीएम मोदी, भारत को AI में भय नहीं दिखता है भाग्‍य

एआइ इंपैक्ट समिट
एआइ इंपैक्ट समिट को संबोधित करते पीएम मोदी।

आरयू वेब टीम। भारत एआइ को लाभकारी दृष्टि से देखता है और इसीलिए हमने ‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’ को अपना विषय चुना है। एआइ को सभी के लिए, विशेषकर वैश्विक दक्षिण के लिए, लोकतांत्रिक बनाना आवश्यक है। भारत को एआई में भय नहीं, भाग्‍य दिखता है। एआइ मशीनों को बुद्धिमान बना रहा है, लेकिन इससे भी बढ़कर, ये मानवीय क्षमताओं को कई गुना बढ़ा रहा है। केवल एक ही अंतर है। इस बार गति अभूतपूर्व है और इसका पैमाना भी अप्रत्याशित है। पहले, प्रौद्योगिकी का प्रभाव दिखने में दशकों लग जाते थे। आज मशीन लर्निंग से लेकर लर्निंग मशीनों तक का सफर पहले से कहीं अधिक तेज, गहरा और व्यापक है।

उक्त बातें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में अपने मुख्य भाषण में एआई और इसके प्रभावों पर प्रकाश डालते हुए कही। साथ ही भारत के इस दृष्टिकोण को रेखांकित किया कि वह इस तकनीक को अपने सभी नागरिकों के लिए सुलभ बनाएगा। मोदी ने कहा कि विश्व के सबसे ऐतिहासिक एआइ शिखर सम्मेलन में आप सभी का स्वागत है। भारत विश्व के सबसे बड़े तकनीकी केंद्र में स्थित है। वैश्विक दक्षिण के लिए ये गर्व की बात है कि एआइ शिखर सम्मेलन का आयोजन भारत में हो रहा है। जब पहली बार वायरलेस तरीके से सिग्नल भेजे गए थे, तब किसी ने कल्पना भी नहीं की थी कि एक दिन पूरी दुनिया वास्तविक समय में जुड़ जाएगी। कृत्रिम बुद्धिमत्ता मानव इतिहास का एक ऐसा रूपांतरण है। आज हम जो देख रहे हैं, जो भविष्यवाणी कर रहे हैं, वह तो इसके प्रभाव की मात्र शुरुआत है।

प्रधानमंत्री ने इस बात पर प्रकाश डाला कि स्वायत्त बुद्धिमत्ता का उपयोग करके एक बेहतर राष्ट्र का निर्माण कैसे किया जा सकता है और कहा कि वर्तमान में हम बुद्धिमत्ता का उपयोग किस प्रकार कर सकते हैं, इसे समझना अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा, “हमें एक व्यापक दृष्टिकोण अपनाना होगा और उतनी ही बड़ी जिम्मेदारी भी निभानी होगी। वर्तमान पीढ़ी के साथ-साथ हमें इस बात की भी चिंता करनी होगी कि हम आने वाली पीढ़ियों को बुद्धिमत्ता का कौन सा स्वरूप सौंपेंगे।

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इसलिए आज का असली सवाल यह नहीं है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता भविष्य में क्या कर सकती है। सवाल ये है कि हम वर्तमान में कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग कैसे करें? ऐसे सवाल मानवता के सामने पहले भी आ चुके हैं। इसका सबसे सशक्त उदाहरण परमाणु ऊर्जा है। हमने इसका विनाश भी देखा है और इसहके सकारात्मक योगदान भी देखे हैं। प्रधानमंत्री ने अपने दृष्टिकोण पर जोर देते हुए कहा कि सभी के कल्याण को सुनिश्चित करने के लिए बुद्धिमत्ता को मानव-केंद्रित बनाना अनिवार्य है।

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