आरयू ब्यूरो, लखनऊ। उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले के जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी डाॅ. अजित सिंह को भ्रष्टाचार के गंभीर शिकायतों और प्रशासनिकअनियमितताओं के आरोपों में शासन ने निलंबित कर दिया है। जांच रिपोर्ट में कई आरोपों की पुष्टि होने के बाद यह कार्रवाई की गई। निलंबन के दौरान उन्हें बेसिक शिक्षा निदेशालय से संबद्ध कर दिया गया है, जबकि उनके खिलाफ विभागीय जांच संयुक्त शिक्षा निदेशक को सौंपी गई है।
डॉ. अजित सिंह के खिलाफ विभिन्न स्तरों पर कई गंभीर शिकायतें जिलाधिकारी अनुनय झा को प्राप्त हुई थीं। शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी ने मामले की निष्पक्ष जांच के लिए नगर मजिस्ट्रेट संजय कुमार की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की। इस समिति में एसडीएम सदर संजय अग्रहरि और डायट के प्राचार्य रमेंद्र सिंह को सदस्य बनाया गया था। समिति को सभी शिकायतों की जांच कर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने की जिम्मेदारी दी गई थी।
जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट 20 जून को जिलाधिकारी को सौंप दी। रिपोर्ट में कई गंभीर अनियमितताओं की पुष्टि की गई। प्रमुख आरोपों में शामिल हैं—
• 61 अभ्यर्थियों की नियुक्ति संबंधी पत्रावलियों का गायब होना।
• ईसीसीई एजुकेटर भर्ती परीक्षा में शासनादेश का पालन न करना।
• सेवानिवृत्त शिक्षकों की पेंशन और अन्य देयकों से संबंधित फाइलों को लंबे समय तक लंबित रखना।
• प्रशासनिक कार्यों में लापरवाही और विभागीय प्रक्रियाओं का सही ढंग से पालन न करना।
• जांच समिति ने इन मामलों को गंभीर मानते हुए कार्रवाई की संस्तुति की।
यह भी पढ़ें- भ्रष्टाचार के केस में निलंबित चल रहे IAS अभिषेक प्रकाश सालभर बाद हुए बहाल, आदेश जारी
जांच रिपोर्ट के आधार पर जिलाधिकारी अनुनय झा ने शासन को डॉ. अजित सिंह को निलंबित करने और उनके विरुद्ध विभागीय जांच कराने की संस्तुति भेजी थी। शासन ने रिपोर्ट का परीक्षण करने के बाद गुरुवार को निलंबन का आदेश जारी कर दिया। वहीं बेसिक शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि निलंबन अवधि के दौरान डॉ. अजित सिंह को बेसिक शिक्षा निदेशालय से संबद्ध रखा जाएगा। साथ ही, उनके विरुद्ध विस्तृत विभागीय जांच संयुक्त शिक्षा निदेशक (षष्ठ मंडल) द्वारा की जाएगी।
अब विभागीय जांच में आरोपों से जुड़े सभी दस्तावेजों, अभिलेखों और संबंधित अधिकारियों के बयान दर्ज किए जाएंगे। जांच पूरी होने के बाद शासन अंतिम निर्णय लेगा और उसी के आधार पर आगे की प्रशासनिक एवं कानूनी कार्रवाई की जाएगी।




















