आरयू ब्यूरो, लखनऊ। लोकदल के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी सुनील सिंह ने आज प्रेसवार्ता में संसद की कार्यप्रणाली और जनता से जुड़े मूल मुद्दों को लेकर भाजपा सरकार पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि देश के सामने किसान, मजदूर, बेरोजगार युवा, रोजगार, महंगाई, ग्रामीण विकास और आम जनता की आर्थिक परेशानियां बड़ी चुनौतियां हैं, लेकिन इन मुद्दों पर संसद में गंभीर बहस नहीं हो रही। वहीं महिलाओं को 50 हजार देने की योगी सरकार की संभावित चुनावी योजना पर भी सुनील सिंह ने सवाल उठाया है।
दस सालों में क्यों नहीं दिया?
महिलाओं को 50 हजार सालाना देने की चुनावी घोषणा पर चौधरी सुनील सिंह ने सवाल उठाते हुए कहा कि यदि योगी सरकार महिलाओं को आर्थिक सहायता देने की योजना लागू कर सकती है, तो पिछले दस वर्षों में भी ऐसा किया जा सकता था। उन्होंने कहा कि चुनाव के समय ही महिलाओं को आर्थिक सहायता देने के वादे क्यों किए जा रहे हैं? भाजपा सरकार को यह भी बताना चाहिए कि जिन राज्यों में पहले ऐसे वादे किए गए, वहां कितने वादे पूरे हुए और वास्तव में कितनी महिलाओं को इसका लाभ मिला। उन्होंने कहा कि महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत करना जरूरी है, लेकिन चुनावी घोषणाओं की पारदर्शिता और उनके वास्तविक क्रियान्वयन का हिसाब जनता के सामने होना चाहिए।
…तो 850 सांसदों की आवाज कैसे सुनी जाएगी?
वहीं सांसद की संख्या पर सुनील सिंह ने कहा, “जब संसद में मौजूद 543 सांसदों की आवाज नहीं सुनी जाती, तो 850 सांसदों की आवाज कैसे सुनी जाएगी?” उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सांसदों की संख्या बढ़ाना ही पर्याप्त नहीं है। जरूरी यह है कि संसद में चुने हुए जनप्रतिनिधियों की आवाज सुनी जाए और जनता के सवालों पर सार्थक चर्चा हो। उन्होंने कहा कि संसद का समय किसानों, मजदूरों, युवाओं, रोजगार, बेरोजगारी, महंगाई और ग्रामीण समस्याओं जैसे वास्तविक मुद्दों पर चर्चा में लगना चाहिए। सरकार को जनता के मूल सवालों का जवाब देना चाहिए।
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वहीं संसद के खर्च और 175 करोड़ के नुकसान के सवाल पर लोकदल सुप्रीमो ने कहा कि “गरीबों और आम जनता के पैसे से चलने वाली संसद में यदि कामकाज बाधित होने के कारण 175 करोड़ रुपये का नुकसान होता है, तो इस नुकसान की भरपाई कौन करेगा?” उन्होंने भाजपा से सवाल किया, “जनता के पैसे से हुए इस नुकसान की भरपाई भाजपा आखिर किन चंदों से करेगी? संसद जनता के पैसे से चलती है, इसलिए संसद के समय और सार्वजनिक धन की बर्बादी की जिम्मेदारी भी तय होनी चाहिए।
FCRA विधेयक पर सरकार से जवाब मांगा
वहीं एफसीआरए से संबंधित विधेयक पर पूछे गए सवाल के जवाब में सुनील सिंह ने कहा कि सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि कानून में बदलाव की आवश्यकता क्यों पड़ी। उन्होंने आरोप लगाया कि यह कदम अमेरिका के दबाव में उठाया जा रहा है और सरकार को देश की जनता के सामने इसकी वास्तविक स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।




















