आरयू ब्यूरो, लखनऊ। राम मंदिर के करोड़ों के चढ़ावा चोरी मामले में यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने सपा निशाना साधते हुए कहा है कि कुछ लोग सिर्फ आयोध्या को बदनाम करना चाहते है। साथ ही सीएम ने आज यह भी कहा है कि एसआईटी का गठन किया गया है और यह दूध का दूध और पानी का पानी अलग कर देगी। इस पर अब सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव ने पलटवार कर कहा कि ‘दूध का दूध, पानी का पानी’ नहीं ‘सोने का सोना, चांदी की चांदी’ करें। चढ़ाए गये पैसों, अनमोल शिलाओं के अलावा बहुमूल्य धातुओं और जेवरों का भी हिसाब देना ही पड़ेगा।
अपने एक्स पोस्ट में अखिलेश यादव ने सीएम योगी के अयोध्या की जनसभा का जिक्र कर उनसे पूछ है कि “आज के भाषण में बयान कम, धमकी अधिक क्यों थी? आज का कार्यक्रम अचानक बना था या जिस दिन एसआइटी बनी थी, उस दिन? सूत्र ये क्यों कह रहे हैं कि स्थानीय भाजपाई विधायकों और पदाधिकारियों के कहने पर ये कार्यक्रम अचानक तय किया गया, जिससे कि भाजपा की राजनीति जमीन बचाई जा सके नहीं तो अयोध्या मंडल ही नहीं, पूरे उत्तर प्रदेश में भाजपा का सूपड़ा साफ़ होना तय है।”
सपा ही अखिलेश ने योगी को नसीहत देते हुए यह भी कहा है कि “भौतिक रूप से अयोध्या का भ्रमण कर, उस एसआइटी के काम को प्रभावित करने की कोशिश न की जाए, जो पहले से ही विवादास्पद सदस्यों और कलंकित छवि के कारण शंकाओं के घेरे में है। आज वहां चेहरा उतरा हुआ क्यों था? आवाज को तो जानबूझकर ऊंची करने का प्रयास पूरा था लेकिन आत्मविश्वास शून्य क्यों था? इस बार अपने खास लोगों से मिले क्यों नहीं?”
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बता दें कि मंदिर ट्रस्ट के अनुरोध के बाद 13 जून को उत्तर प्रदेश सरकार ने तीन सदस्यीय एसआइटी गठित की थी जो इन आरोपों की जांच कर रही है कि मंदिर के दान का करोड़ों रुपया चोरी हो गया है। इसका जिक्र करते हुए, सीएम योगी ने कहा, ‘‘अयोध्या को बदनाम करने और राम जन्मभूमि के बारे में सवाल उठाने के प्रयास किए जा रहे हैं।’’ उन्होंने कहा, ‘‘जब भी भारत सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ा है, साजिशकर्ताओं की नींद उड़ गई है और वे साजिश रचने लगे हैं। वही साजिश फिर से शुरू हो गई है।’’
मुख्यमंत्री ने कहा,‘‘हमने 500 साल इंतजार किया। क्या हम 15 दिन इंतजार नहीं कर सकते? हमें किसी की साजिश में नहीं फंसना चाहिए।’’ एसआईटी का गठन किया गया है और यह दूध का दूध एवं पानी का पानी अलग कर देगी। अगर किसी के पास सबूत है तो उन्हें इसे एसआईटी को सौंपना चाहिए और इसे सार्वजनिक नहीं करना चाहिए, जो भी आरोप लगाएगा उसे नोटिस मिलने पर सबूत देना होगा।’




















