अलीगंज की चार मंजिला अवैध बिल्डिंग में लगी आग, 15 छात्रों की दर्दनाक मौत, कुछ ने कूदकर बचाई जान, नौ घायल

अलीगंज अग्निकांड
दीवार तोड़कर छात्रों की लाश निकालते फायर बिग्रेड के जवान।

आरयू ब्यूरो, लखनऊ। अलीगंज के पुरनिया इलाके में लखनऊ विकास प्राधिकरण और अग्निशमन विभाग के निकम्‍मे अफसरों की वजह से आज 15 बेगुनाहों की जान लेने वाला दर्दनाक हादसा हो गया। यहां एलडीए के नियमों को जूतों की नोक पर रखकर खड़ी की गयी चार मंजिला अवैध इमारत में लगी भीषण आग ने देखते ही देखते ऊपरी मंजिल पर संचालित एनिमेशन कोचिंग सेंटर को भी अपनी चपेट में ले लिया।

बिल्डिंग में फायर एक्जिट न होने के कारण आग लगते ही इमारत में मौजूद दर्जनों छात्र-छात्राएं और अन्य लोग अंदर ही फंस गए। जहां जान बचाने के लिए कुछ युवती व युवकों ने नीचे छलांग लगा दी। इस दौरान एक छात्र की पीठ में सरिया घुसकर आरपार हो गया। वहीं करीब आधा दर्जन छात्रों ने बिजली की केबिल के सहारे दूसरे फ्लोर से नीचे उतरकर जान बचाई।

इस दर्दनाक हादसे में 15 छात्र-छात्राओं की जलने और दम घुटने से मौत हुई है, जबकि नौ लोग घायल हुए है। घायलों की स्थिति देखते हुए मौतों की संख्‍या में बढ़ोतरी होने का अंदेशा है। इसके साथ ही आग से बगल के मकान के ग्राउंड फ्लोर पर स्थित कम्‍यूटर की दुकान में रखा लाखों का सामान भी जलकर नष्‍ट हो गया। आग लगने की वजह एसी में शॉर्टसर्किट होना बताया जा रहा है, हालांकि पुलिस अभी मामले की जांच कर रही है।

वहीं हादसे की जानकारी पर फायर ब्रिगेड और पुलिस बल ने मौके पंर मोर्चा संभाला, जिसमें स्थानीय निवासियों की मदद से अग्निकांड में घायलों हुए नौ युवक-युवतियों को इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया। जबकि शवों को पोस्‍टमॉर्टम के लिए पुलिस ने केजीएमयू की मॉच्‍युरी पहुंचाया, इसी बीच हादसे की जानकारी लगने पर कई छात्रों के रोता-बिलखते परिजन भी पोस्‍टमॉर्टम हाउस पहुंचे थे।

अधिकारी करते रहे कोरम पूरा, हो गया कांड

दिल दहला देने वाला यह हादसा ऐसे समय हुआ है जब दिल्‍ली के मालवीय नगर अग्निकांड में करीब दो दर्जनों लोगों की बीती तीन जून को हुई मौत के बाद एलडीए और अग्निशमन विभाग लखनऊ की इमारतों की फायर एनओसी और फायर एक्जिट समेत अन्‍य जांचें करने का दावा कर रहा था। वहीं 15 बेगुनाहों की जान लेने वाले इस हादसे ने अधिकारियों के निकम्‍मेपन की भी पोल खोल दी।

दोनों ही जगह बंद था ताला

दिल्‍ली और लखनऊ के अग्निकांड में कुछ जानलेवा लापरवाहियों के कॉमन होने की बात भी सामने आयी है। दोनों ही जगह फायर एक्जिट और आग से निपटने के इंतजाम नहीं थे और छतों के दरवाजे पर भी ताला लगा था, जिसके चलते आग लगने के बाद काफी लोग बाहर नहीं निकल सके। ऐसे में यह भी साफ हो गया कि सूबे की राजधानी में बैठे अफसरों ने देश की राजधानी में हुए हादसे से कोई सबक नहीं लिया था, उनका सारा ध्‍यान मीटिंग और फोटो सेशन कराकर अपनी इमेज चमकाना था, जबकि शहर के बीच न सिर्फ बिना सेटबैक छोड़े चार मंजिला बिल्डिंग बनीं थी, बल्कि खतरनाक ढंग से उसके चारों ही फ्लोर का कॉमर्शियल इस्‍तेमाल भी हो रहा था।

मंजर देख सहमे कॉलोनीवासी

आवासीय प्‍लॉट पर घरों के बीच बनी चार मंजिला अवैध कॉमर्शियल बिल्डिंग के आसपास रहने वाले लोगों ने बताया कि छत खुली होती तो भी इतनी बड़ी संख्‍या में आज छात्रों की मौत नहीं होती। अंदर से जो शव निकाले गए उनमें से कई की हालत इतनी खराब थीं कि हड्डियां तक नजर आ रही थीं।

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हादसे के बारे में मिली जानकारी के मुताबिक आज दोपहर करीब डेढ़ बजे पुरनिया स्थित चार मंजिला इमारत के ग्राउंड फ्लोर पर चल रही पेट्स शॉप व क्लिनिक में अचानक आग लगी थी। जिसने कुछ ही मिनटों में पूरी इमारत को अपनी जद में ले लिया। आग की लपटें इतनी तेज थीं कि ऊपर चल रहे एनिमेशन कोचिंग सेंटर से बाहर निकलने का रास्ता पूरी तरह बंद हो गया और पूरी बिल्डिंग में काला धुआं भर गया।

पहली मंजिल पर पेट शॉप मालिक का वेयरहाउस था। दूसरी मंजिल पर थ्री-डी एनीमेशन ट्रेनिंग सेंटर और गेमिंग जोन के साथ 12वीं तक के विद्यार्थियों की कोचिंग चलती थी। सेंटर में हाई लेवल के उपकरण लगे हैं। बिना बॉयोमीट्रिक के कोई भी भीतर नहीं जा सकता है। आग लगने के दौरान बिल्डिंग की बिजली चली गई थी। इससे सारा सिस्टम ठप हो गया और अंदर मौजूद कई लोग बाहर नहीं निकल सके।

वहीं लॉक से बाहर मौजूद छात्रों ने खुद को मौत के मुंह में जाता देखा तो भगदड़ मच गई। कई छात्र जान बचाने के लिए दूसरी व तीसरी मंजिल की खिड़कियों तथा छज्जों से नीचे कूद गए, जिससे वे गंभीर रूप से घायल हो गए। स्थानीय लोगों ने मुस्तैदी दिखाते हुए अपनी ओर से रेस्क्यू शुरू किया और पुलिस को सूचना दी। पुलिस तो समय से आ गयी, लेकिन फायर बिग्रेड की गाडि़यों व एम्‍बुलेंस को मौके पर पहुंचने में करीब एक घंटे का समय लग गया।

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मौके पर पहुंचे दमकलकर्मियों और एसडीआरएफ की टीम ने हाइड्रोलिक क्रेन और सीढ़ियों की मदद से खिड़कियों के शीशे तोड़कर आग बुझाना शुरू किया, जबकि बगल के घर की छत से कोचिंग की दीवार तीन जगाहों से तोड़कर बिल्डिंग में घुसे और इधर-उधर पड़ी हुई युवक-युवतियों की करीब 15 लाशें बाहर निकाली।

मौत से पहले सुनाया था घरवालों को दर्द 

वहीं हादसे में झुलसे और घायल हुए नौ लोगों को रेस्क्यू कर एम्बुलेंस के माध्यम से नजदीकी अस्पतालों और केजीएमयू के ट्रॉमा सेंटर भेजा गया। हादसे का एक दर्दनाक पहलू यह भी है कि अग्निकांड की बलि चढ़ने वालों में से कुछ छात्रों ने आग लगने पर अपने घरवालों को फोन कर आग लगने की बात बताते हुए बचाने की गुहार लगाई थीं, हालांकि आग इतनी तेजी से फैली की किसी को भी बचाया नहीं जा सका। पुलिस ने इन छात्रों के शव को वॉशरूम से बरामद किया है। हादसे में जान गंवाने वालों छात्रों की उम्र 20 से 30 साल के बीच है।

विजय कुमार से विरेंद्र-सुरेंद्र ने खरीदा था प्‍लॉट

बता दें कि 17 जुलाई 1980 को एलडीए ने दिलकुश कॉलोनी निवासी विजय कुमार को अलीगंज योजना का प्‍लाट आवंटित किया था। विजय कुमार ने 19 जनवरी 2013 को अपना भूखंड मदेयगंज सीतापुर रोड निवासी विरेंद्र प्रताप शुक्‍ला और उसके भाई सुरेंद्र प्रताप शुक्‍ला को बेच दिया था। विरेंद्र और सुरेंद्र ने 20 अगस्‍त 2014 को एलडीए से आवासीय नक्‍शा पास कराने के बाद एलडीए के अधिकारी और अभियंताओं से सांठ-गांठ कर आवासीय की जगह चार मंजिला कॉमर्शियल बिल्डिंग तैयार करा ली थीं। आसपास के लोगों के अनुसार करीब साल 2017 से इस बिल्डिंग के कॉमर्शियल शोरूम, क्लिनिक, कोचिंग व अन्‍य व्‍यावासियक गतिविधियां चल रही थीं।

अब एलडीए जुटा रहा दोषियों के नाम, बेशर्मों की भी हो सकती है छुट्टी

वहीं 15 बेगुनाहों की मौत के बाद शासन के चूड़ी कसने पर एलडीए साल 2016 से लेकर अब तक उक्‍त क्षेत्र में तैनात रहे, जोनल अफसर, अधिशासी अभियंता, एई, जेई और सुपरवाइजर की लिस्‍ट तैयार कर रहा है। समझा जा रहा है मामले में लीपा-पोती नहीं हुई तो आज और कल में इन सबपर एलडीए और शासन स्‍तर से कार्रवाई कर दी जाएगी। इसके अलावा अवैध निर्माण की ठेकेदारी में डूबे बहुचर्चित अभियंताओं और सबकुछ जानने के बाद भी बेशर्मी से उनको संरक्षण देने वाले अधिकारियों की भी शासन एलडीए से छुट्टी कर सकता है।

काश! विहित प्राधिकारी न पलटता फैसला

मामले में एलडीए के अधिकारियों की एक और बड़ी कारस्‍तानी सामने आयी है। अलीगंज में 15 बेगुनाहों की जान लेने वाली इस बिल्डिंग को गिराने का आदेश भी एलडीए के विहित प्राधिकारी ने दस मई 2016 को दिया था। करीब दो महीने के अंदर ही इस आदेश को पलटते हुए पांच जुलाई 2016 को इससे निरस्त भी विहित प्राधिकारी ने कर दिया था। हालांकि लगभग हर दिन मामूली बैठकों की भी बड़ी-बड़ी प्रेस नोट जारी करने वाले एलडीए के अफसर इतना बड़ा हादसा होने के बाद प्रेस नोट जारी करना तो दूर इस मामले में अपना मुंह भी खोलने से बचते नजर आए।

वहीं घटनास्थल पर मौजूद डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने जरूर खुलकर अपनी बात रखते हुए 15 मौत की मौत की पुष्टि की है। इसके अलावा केजीएमयू के ट्रामा सेंटर में पांच लोगों का इलाज चल रहा है। अस्पताल में भर्ती सभी लोगों की हालत नाजुक है। उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने भावुक होकर कहा कि दुखद घटना है। हादसे की जानकारी मिलने पर सीएम योगी आदित्‍यनाथ व यूपी के डीजीपी राजीव कृष्‍ण व एलडीए वीसी प्रथमेश कुमार समेत तमाम अधिकारी व नेता पहुंचे थे। सीएम ने हादसे के लिए जिम्‍मेदार विभागों के दोषियों पर कठोर कार्रवाई करने की बात कही है।

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अलीगंज अग्निकांड

कोचिंग सेंटर में लगी आग
कोचिंग सेंटर में लगी आग से बचने के लिए कूदे छात्र।