आरयू वेब टीम। अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी जैसे घिनौने कांड को लेकर विपक्ष लगातार योगी सरकार और हिंदू संगठनों पर हमलावर है। इसी बीच भाजपा-वीएचपी ने सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव व कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी समेत अन्य नेताओं का नाम घसीटा तो कांग्रेस भड़क उठी है। कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने पलटवार करते हुए सोमवार को विश्व हिंदू परिषद को घेरा है। कांग्रेस नेता ने कहा कि चोरी मामले में विपक्षी नेताओं पर हमला करने वाला वीएचपी का हाल ‘उल्टा चोर कोतवाल को डांटे’ वाली कहावत जैसा है।
केसी वेणुगोपाल ने अपने पोस्ट में कहा कि वीएचपी पर पहले निर्मोही अखाड़ा ने 1,400 करोड़ रुपये के राम मंदिर घोटाले का आरोप लगाया था और अब उन विपक्षी नेताओं से पूछताछ की मांग की जा रही है जिन्होंने लूट पर सवाल उठाए थे। यह मांग जितनी बेतुकी है, उतनी ही बेशर्मी भरी भी है। खुद जांच के घेरे में होने के कारण, वीएचपी के पास विपक्ष पर उंगली उठाने का न तो कोई नैतिक अधिकार है और न ही कोई विश्वसनीयता।
आगे कहा कि आखिरकार मंदिर ट्रस्ट का गठन पीएम मोदी ने किया था। ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय, वीएचपी के उपाध्यक्ष और आरएसएस प्रचारक भी हैं। ट्रस्ट के अध्यक्ष भारत के प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव, जिन्हें बीजेपी ने पद्म भूषण से सम्मानित किया है। इसके अलावा केंद्र और राज्य दोनों जगह भाजपा की सरकार है। उन्होंने सवाले उठाते हुए कहा कि ऐसे में प्रियंका गांधी, अखिलेश यादव या अन्य विपक्षी नेताओं पर कैसे उंगुली उठाई जा सकती है। सच तो यह है कि वीएचपी और संघ परिवार की विश्वसनीयता पूरी तरह खत्म हो चुकी है।
‘रक्षकों’ का धर्म से कोई लेना-देना नहीं
कांग्रेस नेता ने कहा कि विवादास्पद राम मंदिर आंदोलन लंबे समय से चंदा चोरी के आरोपों से घिरा रहा और हालिया रिपोर्टों ने एक बार फिर उजागर कर दिया कि हिंदुओं के इन तथा कथित ‘रक्षकों’ का धर्म या भगवान राम से कोई लेना-देना नहीं है। वे केवल भक्तों की आस्था का फायदा उठाते हैं।
साथ ही कहा कि अगर वीएचपी को सचमुच राम मंदिर की पवित्रता की चिंता है तो उसने अपने ही संगठन के उन लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग क्यों नहीं की, जिन्होंने यह बड़ा घोटाला किया? वह उस बीजेपी नेतृत्व पर चुप क्यों है जिसने मंदिर निर्माण का पूरा श्रेय लिया था, लेकिन अब जब उनके द्वारा नियुक्त ट्रस्ट खुद जांच के घेरे में है तो वे कहीं नजर नहीं आ रहे हैं?
सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच की मांग
कांग्रेस सांसद ने आगे कहा कि शर्मिंदा होने के बाद वे अब तमाशा खड़ा करने, मासूमियत का दिखावा करने, तथ्यों को तोड़ने-मरोड़ने, आलोचकों को डराने-धमकाने और ध्यान भटकाने की कोशिश कर रहे हैं ताकि उनकी अपनी नैतिक गिरावट उजागर न हो। उन्होंने आगे कहा कि हम एक स्वतंत्र और सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में होने वाली जांच की अपनी मांग दोहराते हैं। मौजूदा एसआइटी राम मंदिर को लूटने वालों को बचाने के लिए बनाया गया एक दिखावटी तंत्र मात्र है।
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गौरतलब है कि भारतीय जनता पार्टी ने समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव पर गंभीर आरोप लगाए हैं। वहीं विश्व हिंदू परिषद ने कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी समेत कई विपक्षी नेताओं के खिलाफ जांच की मांग करते हुए जांच अधिकारी को पत्र लिखा है।
बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता अजय आलोक ने दावा किया कि राम जन्मभूमि मंदिर गबन मामले के आरोपियों में शामिल रामाशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव की समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव से कई बार फोन पर बातचीत हुई थी। उन्होंने कहा, ‘समाजवादी पार्टी की सच्चाई धीरे-धीरे सामने आ रही है। यह भी सामने आ रहा है कि टिन्नू यादव की अखिलेश यादव से कई बार फोन पर बात हुई थी। जैसे-जैसे इस मामले की परतें खुलेंगी, देश को पता चल जाएगा कि इन चोरी की घटनाओं के पीछे कौन लोग थे।
वहीं विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष और वरिष्ठ अधिवक्ता आलोक कुमार ने जांच अधिकारी को पत्र लिखकर प्रियंका गांधी, रामगोपाल यादव, अरविंद केजरीवाल, संजय सिंह समेत कई नेताओं के बयानों की जांच कराने की मांग की है।




















