प्‍लॉट-फ्लैट व कॉमर्शियल प्रापर्टी के रजिस्‍ट्रेशन तक के लिए अब एक बैंक देगा लोन, LDA-PNB के बीच हुआ MOU

एलडीए पीएनबी एमओयू
एमओयू के साथ एलडीए के एफसी अनिल कुमार सिंह व पीएनबी के अधिकारीगण।

आरयू ब्‍यूरो, लखनऊ। लखनऊ विकास प्राधिकरण की सभी तरह की प्रापर्टी खरीदने के साथ अब उसकी रजिस्‍ट्रेशन फीस तक के लिए बैंक लोगों को लोन देगा। हालांकि यह सुविधा आपको सिर्फ पंजाब नेशनल बैंक से ही मिल सकेगी। अपने छोटे-बड़े खरीददारों को राहत देते हुए लखनऊ विकास प्राधिकरण ने नयी तरह की व्‍यवस्‍था शुरू करने के लिए पीएनबी के साथ आज एमओयू (मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग) साइन किया है।

एलडीए व पीएनबी की जुगलबंदी वाले इस सिस्‍टम से जहां आम लोगों को रजिस्‍ट्रेशन में खर्च होने वाले लाखों व कॉमर्शियल प्रापर्टी खरीदने वाले बड़े खरीददारों को करोड़ों रुपये के लिए परेशान नहीं होना होगा, वहीं पीएनबी के टर्नओवर और कमाई को भी बूस्‍ट मिलेगा, जबकि एलडीए की प्रापर्टी पहले से भी ज्‍यादा तेजी से बिकेगी और नीलाम होगी।

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एमओयू के बाद एलडीए उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने इस बारे में मीडिया से कहा कि ‘पहले आओ-पहले पाओ’ योजना के तहत विभिन्न योजनाओं में उपलब्ध फ्लैट्स खरीदने के लिए ऑनलाइन रजिस्‍ट्रेशन कराना होता है। इसके लिए जनरल कैटेगरी के आवेदक को फ्लैट के अनुमानित मूल्य का पांच प्रतिशत और आरक्षित श्रेणी के आवेदक ढाई प्रतिशत धनराशि बतौर पंजीकरण शुल्क जमा करते हैं।

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इसी तरह नीलामी में प्रस्तावित आवासीय व कॉमर्शियल प्‍लॉट, फ्लैट, दुकान व अन्‍य प्रापर्टी खरीदने के लिए आवेदक को सम्पत्ति के दाम का दस प्रतिशत (उदाहरण- सौ करोड़ के कॉमर्शियल प्‍लॉट का दस करोड़ रुपया) ईएमडी के तौर पर अपने पास से जमा करना पड़ता है। वहीं, लॉटरी के माध्यम से आवंटित किये जाने वाले प्‍लॉट-फ्लैट के लिए भी पंजीकरण धनराशि जमा करनी पड़ती है।

रजिस्‍ट्रेशन का पैसा नहीं होने से होते थे मायूस

प्रथमेश कुमार ने कहा कि प्रापर्टी आवंटित होने पर बैंक आवंटन लेटर के आधार पर आवंटी को लोन दे देते हैं। लेकिन, पंजीकरण धनराशि के लिए कोई भी बैंक लोन की सुविधा नहीं देता है। जिसकी वजह से कई बार नागरिकों को मायूस होना पड़ता था। अब नयी व्यवस्था के तहत ऐसे इच्छुक नागरिक, जो एकमुश्त पंजीकरण धनराशि जमा करने में असमर्थ हैं, वे बैंक लोन की सहायता से सम्पत्ति के लिए आसानी से पंजीकरण करा सकेंगे। उन्हें आर्थिक बाधाओं का सामना नहीं करना पड़ेगा और ज्यादा से ज्यादा लोग प्राधिकरण की योजनाओं का लाभ उठाकर अपनी सम्पत्ति के मालिक बन सकेंगे।

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प्‍लॉट-फ्लैट आवंटन होता है तो…

वहीं एलडीए के वित्‍त नियंत्रक अनिल कुमार सिंह ने बताया कि नयी व्यवस्था के अंतर्गत यदि आवेदक को प्‍लॉट या भवन का आवंटन हो जाता है, तो शेष धनराशि के लिए बैंक से ऋण लेने की प्रक्रिया भी सरल होगी। आवेदक को दोबारा बैंक में विस्तृत कागजी औपचारिकताएं पूरी नहीं करनी पड़ेंगी और समय की बचत होगी।

प्रापर्टी नहीं मिली तो बैंक वापस होगा पैसा

वहीं प्रापर्टी की नीलामी में ऊंची बोली या लॉटरी प्राक्रिया में नाम नहीं आने जैसे मौके पर आवेदक को पैसा नहीं मिलेगा। किसी भी तरह प्रापर्टी का आवंटन नहीं होने की कंडीशन में एलडीए पंजीकरण धनराशि पंजाब नेशनल बैंक के खाते में भेज देगा।

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