यूपी के सबसे बुजुर्ग विधायक का निधन, सादगी-बेदाग छवि की मिसाल थे सपा MLA आलमबदी आजमी

आलमबदी आजमी
आलमबदी आजमी। (फाइल फोटो)

आरयू ब्यूरो, लखनऊ। समाजवादी पार्टी के एक कद्दावर व सबसे बुजुर्ग नेता और आजमगढ़ जिले की निजामाबाद सीट से पांच बार विधायक रहे आलमबदी आजमी का 92 वर्ष की आयु में निधन हो गया। लंबे समय से बीमार चल रहे आजमी ने अपने गृह जनपद आजमगढ़ में गुरुवार को अंतिम सांस ली। आजमी को उनकी सादगी, ईमानदारी और जनसेवा के प्रति समर्पण के लिए जाना जाता था। उनके निधन की खबर से राजनीतिक गलियारों में शोक की लहर दौड़ गई है। उनके समर्थकों और सपाईयों में गहरा दुख व्याप्त है।

परिवार के लोगों के मुताबिक आलमबदी पिछले कुछ समय से बीमार चल रहे थे। जिससे लखनऊ के मेदांता अस्पताल में उपचाराधीन थे। स्वास्थ्य में सुधार होने के बाद कुछ दिन पहले डॉक्टरों ने उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी थी। परिजन भी उनके स्वस्थ होने को लेकर संतुष्ट थे, लेकिन आज अचानक उनका निधन हो गया।

वह आज भी आजमगढ़ के कुर्मीटोला मोहल्ले में एक साधारण पुराने टीनशेड वाले घर में रहते थे। रोडवेज बस, साइकिल या स्कूटर से सफर करते थे। छह दशक तक राजनीति में रहने के बाद भी उनके खिलाफ कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं है। जब उन्हें मंत्री बनाने की पेशकश की गई तो यह कहकर मना कर दिया कि वह जनता के बीच रहकर उनकी सेवा करना चाहते हैं। मंत्री बनने से आम लोगों से दूरी बनने की बात कहते थे। चुनाव के बाद भी हमेशा आम लोगों के बीच रहते और उनकी समस्याओं को सुनते और अपने स्तर से पूरा कराने की कोशिश करते रहते थे।

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सपा नेता की शिक्षा की बात करें तो 16 मार्च 1936 को आजमगढ़ में जन्मे आलमबदी आजमी ने अपना जीवन सार्वजनिक सेवा के लिए समर्पित कर दिया था। उन्होंने 1953 में इस्लामिया कॉलेज, गोरखपुर से 12वीं की शिक्षा पूरी की और 1956 में टेक्निकल इंस्टीट्यूट, गोरखपुर से इलेक्ट्रिकल और मैकेनिकल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा प्राप्त किया।

जिसके बाद राजनीतिक जीवन शुरू किया आलमबदी आजमी ने 1996 से 2007 तक निजामाबाद विधानसभा सीट का प्रतिनिधित्व किया। इस दौरान उन्होंने कई बार अपने प्रतिद्वंद्वियों को करारी शिकस्त दी, जिनमें अंगद यादव भी शामिल थे और निजामाबाद सीट से पांचवीं बार विधायक बनकर क्षेत्र के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनके परिवार में छह बच्चे हैं।

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