आरयू ब्यूरो, लखनऊ। यूपी की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने दिल्ली में चल रहे कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन व चढ़ावा चोरी जैसे मुद्दे पर केंद्र सरकार और कोर्ट से सौहार्दपूर्ण समाधान निकालने का आग्रह किया है। जबकि समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी का नाम लिए बिना इशारों में विपक्षी दलों की भूमिका पर भी सवाल उठाए। मायावती ने निशाना साधते हुए कहा कि जनहित से जुड़े मुद्दों का राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल करना उचित नहीं है और इससे समाधान की बजाय टकराव की स्थिति पैदा होती है।
मायावती ने आज अपने आधिकारिक एक्स अकाउंट पर पोस्टकर कहा कि कॉकरोच जनता पार्टी का देश की राजधानी नई दिल्ली में संसद के नजदीक जंतर- मंतर पर पिछले कई दिनों से चल रहा अनिश्चितकालीन आंदोलन मुख्य रूप से नीट जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक और अन्य गड़बड़ियों से प्रभावित छात्रों तथा उनके परिवारों की परेशानियों से जुड़ा है। इस आंदोलन के कारण सड़क से लेकर संसद तक हंगामा देखने को मिल रहा है और अब इसका राजनीतिकरण होने से यह सरकार के साथ सीधे टकराव का विषय बन गया है। साथ ही बसपा मुखिया ने कहा कि इस विषम स्थिति से देश को निकालना जरूरी है, क्योंकि इससे दिल्ली में ही नहीं बल्कि विभिन्न राज्यों में भी आम जनजीवन प्रभावित हो रहा है।
बसपा प्रमुख ने कहा कि चाहे अयोध्या के श्रीराम मंदिर में चढ़ावे की चोरी और गबन का मामला हो या फिर देशभर में सामने आ रहे आल-इंडिया व राज्यों की परीक्षाओं आदि में पेपर लीक का मुद्दा हो, यह सभी मूलतः भ्रष्टाचार के हर स्तर पर पनपने का ही परिणाम है। यह भ्रष्टाचार समाज और शासन व्यवस्था के हर स्तर पर फैल चुका है। जिसके कारण आम लोगों का विश्वास कमजोर हो रहा है। उन्होंने कहा कि यह केवल प्रशासनिक विफलता नहीं बल्कि संवैधानिक नैतिकता से जुड़ा गंभीर विषय भी है। जिसके अभाव में यह देश को दीमक की तरह खाता चला आ रहा है, जबकि संविधान निर्माता परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अंबेडकर ने गुड गवरनेंस हेतु इस पर खास ध्यान देने की जरूरत पर विशेष बल दिया है।
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इस दौरान अपील करते हुए मायावती ने कहा का संक्षेप में मेरा यही कहना है कि देश व जनहित से जुड़े वर्तमान विकट हालात के सौहार्दपूर्ण समाधान के लिए सरकार तथा माननीय कोर्ट जैसी संवैधानिक संस्थाओं को अपनी भूमिका निभाने की पहल करनी चाहिये तो यह बेहतर होगा। साथ ही विपक्ष पर निशाना साधते हुएकहा कि, सीजेपी के व्यापक हो रहे आन्दोलन का अब विभिन्न राजनीतिक पार्टियों द्वारा अपने-अपने संकीर्ण स्वार्थ में राजनीतिकरण करके सड़क से लेकर संसद तक में टकराव व हिंसा किया जाना घोर अनुचित। सरकार व आंदोलनकारी दोनों मिलकर इसका शान्ति व सौहार्दपूर्ण समाधान जितना जल्द निकालें उतना ही उचित।




















