मायावती की राजनीतिक दलों को सलाह, सदन को हंगामे से बचा, करें पेपर लीक-चढ़ावा चोरी समेत ज्वलन्त मुद्दों पर चर्चा

मायवती

आरयू ब्यूरो, लखनऊ। सोमवार से शुरू हो रहे संसद के मॉनसून सत्र से पहले विपक्ष राम मंदिर चढ़ावा चोरी, नीट पेपर लीक, विपक्षी दलों में तोड़-फोड़ जैसे गंभीर मुद्दों पर मोदी सरकार को घेरने की तैयारी में है। इस बीच बहुजन समाज पार्टी की मुखिया मायावती ने रविवार को राजनीतिक दलों को सलाह देते हुए कहा कि सदन को हंगामा और स्थगन से बचाकर नीट पेपर लीक व राम मंदिर चढ़ावा चोरी समेत देश की अन्य समस्याओं पर चर्चा करनी चाहिए। देश के ज्वलन्त मुद्दों से उत्पन्न आक्रोश एवं आंदोलित माहौल को शांत करने के लिए गंभीरता दिखाई जाएगी।

मायावती ने एक्स पर पोस्ट में कहा कि एक बार फिर देश व आमजन की चिन्ता है कि क्या इस बार भी फिर संसद का सत्र हंगामा व स्थगन आदि की भेंट चढ़ जायेगा या फिर जबरदस्त महंगाई, गरीबी, बेरोजगारी, महिला असुरक्षा, महत्वपूर्ण परीक्षाओं के भी पेपरलीक आदि से जुड़े देश के ज्वलन्त मुद्दों से उत्पन्न उत्तेजित, आक्रोशित व आन्दोलित माहौल को शान्त करने व इनके संतोषजनक समाधान हेतु गंभीरता दिखाई जायेगी।

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राम मंदिर का जिक्र करते हुए बसपा मुखिया ने कहा कि खासकर अयोध्या श्रीराम मन्दिर में चढ़ावा चोरी, हेराफेरी व गबन को लेकर व्यापक जन आक्रोश ने भी यूपी व देश को काफी झकझोर दिया है और लोग, धर्म का चुनावी स्वार्थ हेतु राजनीतिकरण करने वालों को इसके लिये कठघरे में खड़ा करके, उनसे दिल दुखाने की जवाबदेही मांग रहे हैं, जिसकी गूंज सड़कों से लेकर अदालत तक में है और संसद में भी यह मुद्दा जरूर गर्म होगा, जिसपर भी लोगों की पैनी नजर है।

राज्यों में बढ़ती महिला असुरक्षा

मायावती ने आगे कहा कि चाहे वो बंगाल में विधानसभा आमचुनाव के बाद के हालात्, राजस्थान में सरकार की लापरवाही के कारण गर्भवति महिलाओं की मौत सहित विभिन्न राज्यों में बढ़ती महिला असुरक्षा, काफी आपाधापी में की जाने वाली चुनावी रेवड़ियों में भारी गड़बड़ी, सरकारी योजनाओं आदि में चर्चित भ्रष्टाचार, पुलिस मुठभेड़ का प्रचलन, वर्षों से बसे लोगों को उजाड़ उनके कालोनियों का ध्वस्तीकरण जैसे सरकारी रवैयों से चरमराई संविधान की जनकल्याणकारी व्यवस्था या भारत की अर्थव्यवस्था हो।

संकीर्णता त्याग सत्ता-विपक्ष एकजुटता से निकाले उपाय 

देश के मौजूदा हालात पर बसपा मुखिया ने सलाह देते हुए कहा कि यहां के जनजीवन को बुरी तरह से प्रभावित करती हुई अमेरिका-इजराइल का ईरान के विरुद्ध लगातार युद्ध व रुपया का अवमूल्यण आदि देश व जनहित के ऐसे खास मुद्दे हैं जिनपर राजनीतिक द्वेष, स्वार्थ व आरोप-प्रत्यारोप की संकीर्णता को त्यागकर सत्ता और विपक्ष दोनों को एकजुट होकर अच्छा उपाय ढूंढ कर सराहनीय कार्य करना होगा। वरना लगभग 140 करोड़ की जनसंख्या वाले अपने देश में बहुजनों का जीवन यहां और भी अधिक बुरे दिन वाला बनकर उनका भविष्य अधर में लटकायेगा, जिसकी आशंका भी व्यक्त की जा रही।

जरूरत के हिसाब से सभी की जिम्मेदारी

बसपा प्रमुख ने ये भी कहा कि देश को त्रस्त करने वाली इन भारी चुनौतियों व उसके प्रति चेतावनियों को ध्यान में रख संसद के मानसून सत्र को, बिना किसी उत्तेजना, रोष व विद्वेष के सुचारू, शान्तिपूर्ण एवं स्वस्थ्य लोकतांत्रिक परम्परा के मुताबिक चलना सुनिश्चित किया जाना चाहिये, जो वक्त की अहम् जरूरत के हिसाब से सभी की जिम्मेदारी भी बनती  है। साथ ही इस सम्बंध में सभी संस्थाओं को ऐसा प्रयास जरूर करना चाहिये कि देश के कठिन सामाजिक, राजनीतिक व आर्थिक हालात से त्रस्त भारतीयों के जीवन का बोझ व नित्य दिन की उनकी दिक्कतें और अधिक नहीं बढ़ने पायें। इसकी शुरूआत अगर संसद के वर्तमान मानसून सत्र से ही हो तो यह अवश्य ही बेहतर होगा। जनहितैषी गुड गवरनेन्स के लिए संसद का प्रभावी होना जरूरी।

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