आरयू वेब टीम। वोट चोरी को लेकर चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कॉकरोच जनता पार्टी के विरोध प्रदर्शन को देखते हुए दिल्ली पुलिस द्वारा लगाए गए कड़े प्रतिबंधों और 57 मेट्रो स्टेशनों को बंद करने के फैसले पर देश की सबसे बड़ी अदालत ने तल्ख टिप्पणी की है। जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की स्पेशल बेंच ने मोदी सरकार, दिल्ली पुलिस, रेलवे और डीएमआरसी को कारण बताओ नोटिस जारी किया है।
दिल्ली में प्रदर्शन को लेकर दायर अवमानना याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली पुलिस,डीएमआरसी और रेलवे को अवमानना का नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने कहा कि बैरिकेडिंग की समीक्षा की जानी चाहिए। साथ ही कोर्ट ने केंद्र सरकार को पांच सख्त निर्देश जारी किए हैं। ऐसे में आइये जानते हैं कोर्ट ने क्या निर्देश दिए हैं।
जस्टिस बागची ने कहा कि हमने आर्टिकल 19 के तहत अधिकारों की रक्षा की है। कानूनी कर्तव्यों के उल्लंघन पर हमें जवाब चाहिए। कोर्ट ने ये भी कहा कि बिना बैज के पुलिस अधिकारियों द्वारा बल प्रयोग किए जाने की जांच की जाएगी। जस्टिस बागची ने एसजी से कहा कि आर्टिकल 32 के तहत हमारी ये जिम्मेदारी है कि हम मौलिक अधिकारों के उल्लंघन को रोकें।
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सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को निर्देश दिया है कि वे शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को उन जगहों पर हिरासत में न लें, जहां बीएसएस की धारा 163 लागू नहीं है। कोर्ट ने मेट्रो और रेल सेवाओं को सामान्य रूप से चलाने और कानून के मुताबिक इंटरनेट सुविधाएं बिना किसी रुकावट के जारी रखने का आदेश दिया है। साथ ही यह भी निर्देश दिया है कि लोगों और ट्रैफिक की आवाजाही की अनुमति दी जाए और बैरिकेड्स की जरूरत की समीक्षा की जाए।
सुप्रीम कोर्ट का मोदी सरकार को निर्देश
मेट्रो और रेल सुविधाएं सामान्य रूप से चलेंगी, जब तक कि आर्टिकल 19(2) के तहत पब्लिक ऑर्डर में गड़बड़ी को देखते हुए कोई नियम लागू करने की जरूरत न पड़े।
शहर में लोगों की आवाजाही पर ट्रैफिक नियमों के तहत कोई रोक नहीं होगी। कानून-व्यवस्था और ट्रैफिक की स्थिति को देखते हुए बैरिकेड लगाने के फैसले की तुरंत समीक्षा की जाएगी।
इंटरनेट सुविधाएं बिना किसी रुकावट के चलती रहेंगी।
कानून के अनुसार शहर में लोगों की आवाजाही सुचारू रूप से जारी रहेगी।
कानून द्वारा तय प्रक्रिया के बिना किसी को हिरासत में नहीं लिया जाएगा, खासकर उन इलाकों के बाहर जहां शांतिपूर्ण और बिना हथियारों वाले लोगों का जमावड़ा हो और जहां बीएसएस की धारा 163 लागू न हो।
सुप्रीम कोर्ट के आसपास धारा 163 के बारे में कोर्ट ने कहा ‘हम अधिकारियों को निर्देश देते हैं कि अगर बोर्ड नहीं हटाया गया है तो उसे हटा दें, ताकि किसी को भी कोर्ट तक पहुंचने (आने-जाने) में परेशानी न हो और न्याय पाने में कोई डर या शंका न रहे।




















