आरयू ब्यूरो, लखनऊ। बसपा सुप्रीमो मायावती ने यूपी, उत्तराखंड और पंजाब में अकेले ही चुनाव में लड़ने का ऐलान किया है। मायावती ने कहा कि बसपा अकेले ही पंजाब, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के चुनाव लड़ेगी और अच्छा रिजल्ट लाने का संकल्प लिया गया है। मायावती का कहना है कि इन चुनावों में बसपा कर्मठ और ईमानदार लोगों को उम्मीदवार बनाने पर जोर देगी। साथ ही नौ अक्तूबर को बसपा के संस्थापक कांशीराम की जयंती को देश भर में बड़े पैमाने पर मनाने का ऐलान किया है।
मायावती ने एक्स पर एक प्रेस रिलीज शेयर की है, जिसमें बताया है कि बसपा संगठन की लंबी बैठक के बाद इन निर्णयों पर सहमति बनी है। एक फैसला ये भी लिया गया है कि 15 जनवरी, 2027 यानी मायावती के जन्मदिन के मौके पर जनकल्याणकारी दिवस का आयोजन होगा। इस दौरान पिछली बार से ज्यादा आर्थिक सहयोग समाज से जुटाया जाएगा। इससे अंबेडकरवादी विचारधरा के प्रसार और बसपा के मूवमेंट को मजबूत किया जाएगा।
बैठक में ये भी तय हुआ कि पंजाब में पार्टी अपने जनाधार को बढ़ाने पर फोकस करेगी। जबकि यूपी और उत्तराखंड में उम्मीदवारों के चयन में पारदर्शिता बरती जाएगी। बसपा के संगठन को बूथ स्तर पर मजबूत करने पर भी मंथन किया गया। लखनऊ कार्यालय में हुई इस मीटिंग के दौरान मायावती ने पदाधिकारियों को संबोधित कर ऐलान किया कि उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की तरह ही पंजाब का चुनाव भी बसपा अकेले लड़ेगी और अच्छा परिणाम लाएगी।
यूपी की पूर्व सीएम ने कहा कि हमें कार्यकर्ताओं का मनोबल बनाए रखना है। ऐसा इसलिए क्योंकि यह भी कहा जाएगा कि बसपा की सीटें और वोट प्रतिशत अकेले लड़ने से कम होगा। ऐसे में विरोधियों के सभी साम, दाम, दंड, भेद आदि हथकंडों का डट कर सामना करना होगा। मायावती ने पंजाब को लेकर कहा कि वहां राज्य की जनता आम आदमी पार्टी, कांग्रेस और भाजपा समेत सभी दलों के रवैये और सरकारों से त्रस्त है। अब बसपा को वहां बदलाव के लिए काम करना होगा।
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मालूम हो कि मायावती और अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी ने 2019 के आम चुनाव से पहले गठबंधन किया था, लेकिन चुनाव के बाद बसपा अलग हो गई थी। तब बसपा के दस लोकसभा सांसद जीते थे, जबकि सपा को पांच सीटें ही मिली थीं। मायावती ने अलग होते हुए सपा पर आरोप लगाया था कि उनके साथ गठबंधन से हमें कोई फायदा नहीं हुआ। लंबे समय बाद वह मौका था, जब बसपा किसी दल से मिलकर चुनाव लड़ी थी। इसके अलावा लोकसभा इलेक्शन 2024 में तो एक भी सांसद उसका नहीं चुना जा सका।



















