आरयू ब्यूरो, लखनऊ/गाजियाबाद। मेरठ के सरधना क्षेत्र स्थित कपसाड़ गांव में दलित महिला की हत्या और उनकी 20 वर्षीय बेटी के अपहरण के मामले ने राजनीतिक तूल पकड़ लिया है। आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और नगीना से सांसद चंद्रशेखर आजाद पीड़ित परिवार से मिलने मेरठ पहुंचने की कोशिश की, लेकिन यूपी पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए दिल्ली से मेरठ तक चार स्तर की सख्त नाकेबंदी कर दी। इस दौरान चंद्रशेखर और पुलिस के बीच तीखी नोकझोंक हुई, जिसके बाद उन्होंने पुलिस को चकमा देकर सड़क पर दौड़ लगा दी।
बताया जा रहा है कि चंद्रशेखर आजाद दिल्ली से अपने समर्थकों के साथ मेरठ के लिए रवाना हुए थे। रास्ते में गाजियाबाद-हापुड़ बॉर्डर और अन्य जगहों पर भारी पुलिस बल तैनात था। पुलिस ने उनका काफिला रोक लिया और आगे जाने से मना कर दिया। इस पर चंद्रशेखर ने पुलिस अधिकारियों से बहस की और कानून-व्यवस्था बिगड़ने का हवाला देकर रोकने का विरोध जताया। जिसपर चंद्रशेखर को पुलिस बैरिकेडिंग के पास सड़क पर तेज दौड़ लगाई और किसी तरह बाइक या अन्य साधन से आगे निकल गए।
इससे पहले चंद्रशेखर ने वीडियो कॉल पर पीड़ित परिवार से बात की और मेरठ के एडीएम को कड़ी फटकार भी लगाई थी। उन्होंने कहा, “गुंडागर्दी यहां नहीं चलेगी। लखीमपुर खीरी जैसे मामले में मुआवजा देते हैं, यहां भी न्याय होना चाहिए। मेरठ को हाथरस नहीं बनने देंगे।” उन्होंने प्रशासन पर दबाव बनाने और आरोपित पारस सोम के खिलाफ सख्त कार्रवाई न करने का आरोप लगाया।
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गौरतलब है कि गुरुवार को कपसाड़ गांव में आरोपित पारस सोम और उसके साथियों ने कथित तौर पर दलित युवती का अपहरण करने की कोशिश की। विरोध करने पर युवती की मां की हत्या कर दी गई। पुलिस ने मुख्य आरोपित को गिरफ्तार कर लिया है, लेकिन परिवार का आरोप है कि अपहरण की शिकायत पर त्वरित कार्रवाई नहीं हुई। कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि युवती स्वेच्छा से घर से गई थी, लेकिन परिवार और दलित संगठन इसे अपहरण मान रहे हैं।



















