आरयू ब्यूरो, लखनऊ। माघ मेले में मौनी अमावस्या के दिन शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को संगम स्नान से रोके जाने, उनके शिष्यों के साथ मारपीट और अपमान के विरोध में धरने पर बैठे शंकराचार्य की तबीयत आज बिगड़ी गयी है। जिसकी सूचना पर आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह शुक्रवार को प्रयागराज पहुंचे और उनसे भेंट कर हालचाल जाना। संजय सिंह ने इस घटना को उत्तर प्रदेश सरकार और प्रशासन का अक्षम्य अपराध बताते हुए कहा कि प्रधानमंत्री पैर छुएं तो स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद शंकराचार्य हैं और अगर वही आलोचना करें तो उनस प्रमाण मांगा जाता है। ये न केवल धर्म पर हमला है, बल्कि हिंदू परंपराओं और आस्था का खुला अपमान है।
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संजय सिंह ने कहा कि शंकराचार्य हमेशा सरकार की गलत नीतियों का विरोध करते आए हैं। चाहे सत्ता में भाजपा हो, बसपा हो, सपा हो या आम आदमी पार्टी। धर्म और धार्मिक रीति-रिवाजों के खिलाफ जब भी कोई काम होता है। उसका विरोध करते हैं और यही बात सत्ता को खटकती है। आप सांसद ने प्रयागराज प्रशासन से सवाल किया कि जब महाकुंभ में अन्य शंकराचार्यों के साथ शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद जी को शंकराचार्य के रूप में स्नान कराया गया, तब वे शंकराचार्य थे और जब देश के प्रधानमंत्री स्वयं उनके चरण स्पर्श करते हैं, तब भी वे शंकराचार्य ही होते हैं, लेकिन जैसे ही उन्होंने सरकार की आलोचना की, उनसे पूछा जाने लगा कि आप शंकराचार्य हैं या नहीं। यह दोहरा चरित्र और तानाशाही मानसिकता नहीं तो और क्या है?
चोटी खींचकर पीटा गया
संजय सिंह ने अपने बयान में कहा कि ये अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और शर्मनाक घटना है, जिसका उदाहरण न पहले कभी मिला है और न आगे मिलेगा। शंकराचार्य जी के शिष्यों को धक्का देकर, चोटी खींचकर पीटा गया, उन्हें अपमानित किया गया और स्वयं शंकराचार्य जी को पावन संगम स्नान से रोका गया। ये घोर अपराध और पाप है, जिसकी जिम्मेदार सीधे तौर पर योगी सरकार और उसका प्रशासन है। इससे भी अधिक अपमानजनक ये है कि अविमुक्तेश्वरानंद से उनके शंकराचार्य होने का प्रमाण मांगा गया।
अपनी डिग्री तक नहीं दिखा पाए वे आज…
इस दौरान आप सांसद ने कटाक्ष करते हुए कहा कि जो लोग आज तक अपनी डिग्री तक नहीं दिखा पाए, वे आज शंकराचार्य जी से उनके शंकराचार्य होने का प्रमाण मांग रहे हैं। ये कैसा धर्म और कैसी व्यवस्था उत्तर प्रदेश में चल रही है? शंकराचार्य कौन है और कौन नहीं, इसका फैसला न प्रधानमंत्री करेंगे, न मुख्यमंत्री, न कोई पुलिस कमिश्नर और न ही कोई कानूनगो। शंकराचार्य हिंदू धर्म की परंपरा और शास्त्रीय रीति-रिवाजों से तय होते हैं, और इस पर सवाल उठाने का किसी को कोई अधिकार नहीं है। आम आदमी पार्टी इस अन्याय के खिलाफ चुप नहीं बैठेगी और शंकराचार्य के सम्मान और अधिकारों की रक्षा के लिए पूरी ताकत से संघर्ष करेगी।




















