“सीतापुर के स्‍कूल में बच्‍चों को दिया गया खाना जानवरों के लायक भी नहीं”, संजय सिंह ने मांगा योगी सरकार से जवाब

पानी जैसी सब्‍जी
स्‍कूल में बच्‍चों की दी गयी पानी जैसी सब्‍जी।

आरयू ब्‍यूरो, लखनऊ। सीतापुर जिले के सरकारी प्राथमिक स्‍कूल में मिलने वाले घटिया मिड डे मील का वीडियो वायरल होने के बाद योगी सरकार विपक्ष से घिर गयी है। गुरुवार को आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने भी इसको लेकर योगी सरकार से जवाब मांगा है। सांसद ने कहा है कि मिड डे मील के नाम पर बच्‍चों को यूपी में ऐसा भोजन परोसा गया जिसे इंसानों को तो छोड़िए, जानवरों को भी नहीं दिया जा सकता है।

आप के यूपी प्रभारी ने आज अपने एक बयान में सीतापुर के मिड डे मील का जिक्र करते हुए कहा कि यह घटना सरकारी व्यवस्था की संवेदनहीनता और शिक्षा व्यवस्था की गंभीर विफलता को उजागर करती है।

संजय सिंह ने कहा कि मिड डे मील योजना का उद्देश्य बच्चों को पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराकर शिक्षा के प्रति प्रोत्साहित करना है, लेकिन यदि बच्चों को घटिया और अमानवीय गुणवत्ता का भोजन दिया जाएगा तो यह उनके स्वास्थ्य और भविष्य दोनों के साथ खिलवाड़ है।

दोषियों पर कठोर कार्रवाई व सभी स्‍कूलों की हो जांच

साथ ही आज सांसद ने योगी सरकार के साथ ही केंद्र से भी मांग की है कि सीतापुर की घटना की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए। इसके अलावा उत्‍तर प्रदेश के सभी विद्यालयों में मिड डे मील की गुणवत्ता की व्यापक जांच कराई जाए तथा बच्चों को पौष्टिक, स्वच्छ और मानक के अनुरूप भोजन उपलब्ध कराया जाए।

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वहीं संजय सिंह ने जंतर-मंतर प्रदर्शन के दौरान छात्र-छात्राओं पर हुई बर्बरता को लेकर मोदी सरकार पर भी निशाना साधा है। आप नेता ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में अपनी आवाज़ उठाने वाले छात्रों पर आंसू गैस के गोले, पैलेट गन और ए.के.-47 जैसे हथियारों का प्रयोग अत्यंत चिंताजनक है।

आंसू गैस, पैलेट गन व AK-47 कि‍तना खर्च किया

साथ ही अमित शाह से सवाल किया है कि “छात्रों पर चलाए गए आंसू गैस, पैलेट गन और ए.के.-47 पर कितना बजट खर्च किया गया? देश के गृहमंत्री सदन में आकर इसका जवाब दें और बताएं कि छात्रों के खिलाफ इतनी कठोर कार्रवाई क्यों की गई।” संजय सिंह ने कहा कि लोकतंत्र में छात्रों की आवाज़ को दबाने के बजाय उनकी बात सुनी जानी चाहिए और देश के बच्चों के स्वास्थ्य एवं शिक्षा के साथ किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जा सकता।

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