योगी की कैबिनेट में आउटसोर्सिंग सेवा निगम समेत 15 प्रस्तावों को मिली मंजूरी

कैबिनेट बैठक
मंत्रियों के साथ बैठक करते सीएम योगी।

आरयू ब्यूरो, लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में कई बड़े निर्णय लिए गए। इस बैठक में कुल 15 प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। जिनमें ई-बस सेवा, आउटसोर्सिंग सेवा निगम, इलेक्ट्रॉनिक्स पॉलिसी, निर्यात प्रोत्साहन नीति, विश्वविद्यालय की स्थापना और दिव्यांगजन सशक्तिकरण केंद्र से जुड़े अहम फैसले शामिल हैं।

नगर विकास विभाग के प्रस्ताव को मंजूरी देते हुए सरकार ने लखनऊ और कानपुर में नगरीय परिवहन हेतु ई-बसों के संचालन की योजना को हरी झंडी दी है। लखनऊ और कानपुर में दस-दस रूटों पर ई-बस संचालन के लिए प्रस्ताव को हरी झंडी दी गई। नई योजना के तहत प्रत्येक रूट पर कम से कम दस बसें चलेंगी, और बस संचालन 12 साल की अवधि के कॉन्ट्रैक्ट पर होगा। निजी ऑपरेटर बसों के डिजाइन, वित्तपोषण, निर्माण, आपूर्ति और अनुरक्षण के लिए जिम्मेदार होंगे।

वहीं प्रदेश के वित्त एवं संसदीय कार्यमंत्री सुरेश खन्ना ने कैबिनेट के निर्णयों की जानकारी देते हुए बताया कि प्रदेश के विभिन्न विभागों और संस्थाओं में लंबे समय से आउटसोर्सिंग एजेंसियों के माध्यम से बड़ी संख्या में कार्मिक सेवाएं प्रदान कर रहे थे। लेकिन, लगातार यह शिकायतें सामने आ रही थीं कि उन्हें सरकार द्वारा स्वीकृत मानदेय का पूरा भुगतान नहीं मिल रहा। साथ ही ईपीएफ, ईएसआई जैसी अनिवार्य सुविधाओं का नियमित अंशदान भी कई बार एजेंसियों द्वारा नहीं किया जाता था। इन अनियमितताओं को खत्म करने और कर्मचारियों के हितों की रक्षा के लिए यह निगम गठित किया गया है।

ऐसी होगी नई व्यवस्था-

▪️अब आउटसोर्सिंग एजेंसियों का चयन सीधे विभाग नहीं करेंगे, बल्कि निगम जेम पोर्टल के माध्यम से निष्पक्ष और पारदर्शी प्रक्रिया से एजेंसी तय करेगा।

▪️ कर्मचारियों का मानदेय 16 से 20 हजार रुपये प्रतिमाह निर्धारित किया गया है।

▪️ आउटसोर्स कर्मचारियों से महीने में 26 दिन सेवा ली जा सकेगी।

▪️ कर्मचारी तीन वर्षों के लिए अपनी सेवाएं दे सकेंगे।

▪️ कर्मचारियों का वेतन 1 से 5 तारीख तक सीधे उनके खातों में जाएगा।

▪️ ईपीएफ और ईएसआई का अंशदान अब सीधे कर्मचारियों के खाते में जाएगा, पहले यह राशि सर्विस प्रोवाइडर के पास चली जाती थी।

▪️ किसी भी प्रकार की अनियमितता पाए जाने पर सेवा तुरंत समाप्त की जा सकेगी।

▪️ आउटसोर्सिंग के लिए चयन प्रक्रिया में लिखित परीक्षा और साक्षात्कार का प्रावधान किया गया है। इससे बेहतर गुणवत्ता वाले और योग्य कार्मिकों की नियुक्ति सुनिश्चित होगी।

वित्त मंत्री ने बताया कि नई व्यवस्था में संवैधानिक प्रावधानों के तहत एससी, एसटी, ओबीसी, ईडब्ल्यूएस, दिव्यांगजन, भूतपूर्व सैनिक और महिलाओं को नियमानुसार आरक्षण मिलेगा। महिलाओं को मैटरनिटी लीव का भी अधिकार दिया जाएगा। कर्मचारियों की कार्यक्षमता और दक्षता बढ़ाने के लिए समय-समय पर प्रशिक्षण भी प्रदान किया जाएगा। इसके अलावा, सेवा के दौरान कर्मचारी की मृत्यु होने पर 15 हजार रुपये अंतिम संस्कार सहायता के रूप में दिए जाएंगे।

इन फैसलों को भी मिली हरि झंडी-

आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग: इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के निर्माण के लिए छह साल की इलेक्ट्रॉनिक पॉलिसी को स्वीकृति मिली। इस नीति के तहत डिस्प्ले, कैमरा मॉड्यूल और मल्टीलेयर पीसीबी जैसे 11 प्रमुख घटकों के निर्माण में लाभ मिलेगा।

उत्तर प्रदेश निर्यात प्रोत्साहन नीति 2025-30: वैश्विक स्तर पर उत्तर प्रदेश को निर्यात हब बनाने की दिशा में नीति को मंजूरी दी गई। नई नीति डिजिटल तकनीक, अवसंरचना, वित्तीय सहायता, निर्यात ऋण और बीमा, बाजार विस्तार, प्रशिक्षण एवं क्षमता निर्माण पर ध्यान केंद्रित करेगी। नीति का लक्ष्य 2030 तक पंजीकृत निर्यातकों की संख्या में 50 प्रतिशत वृद्धि करना और सभी जिलों को निर्यात गतिविधियों से जोड़कर क्षेत्रीय संतुलन सुनिश्चित करना है।

शैक्षणिक संस्थान: शाहजहांपुर में मुमुक्ष आश्रम ट्रस्ट के अंतर्गत ‘स्वामी शुकदेवानंद राजकीय विश्वविद्यालय’ की स्थापना को मंजूरी दी गई। विश्वविद्यालय बनने के बाद ट्रस्ट के पांच मौजूदा संस्थान इसका संचालन करेंगे।

सामाजिक और क्षेत्रीय विकास: वाराणसी के रामनगर में तीन एकड़ भूमि पर दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग के लिए ‘समेकित क्षेत्रीय केंद्र’ की स्थापना हेतु भूमि निःशुल्क हस्तांतरित की जाएगी। संभल के तीन तीर्थों का पुनरुद्धार किया जाएगा, जिसके लिए शासन ने वंदन योजना के तहत करीब 600 करोड़ रुपये स्वीकृत किए हैं।

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कैबिनेट बैठक में अन्य प्रमुख निर्णयों में नगर परिवहन को आधुनिक बनाने, ई-बस संचालन के विस्तार और आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर में उत्पादन प्रोत्साहन शामिल हैं।

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