आरयू वेब टीम। लोकसभा में एंटी पेपर लीक कानून पर चर्चा के दौरान विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने छात्रों के विरोध प्रदर्शन का खुलकर समर्थन किया। साथ ही कहा कि देशभर में सड़कों पर उतरे युवाओं का गुस्सा पूरी तरह जायज था और उनकी आवाज को गंभीरता से सुना जाना चाहिए। ये आंदोलन नफरत या हिंसा का नहीं, बल्कि अपने भविष्य को लेकर चिंतित युवाओं की भावनाओं का प्रतीक था, हालांकि कांग्रेस भाषण के दौरान कुछ टिप्पणियों और आरोपों को लेकर सदन में जोरदार हंगामा भी देखने को मिला
वहीं अपने संबोधन के दौरान राहुल गांधी ने छात्रों, आम नागरिकों और एक तीसरी श्रेणी का जिक्र करते हुए “अंधभक्त” शब्द का इस्तेमाल किया। इस पर सत्ता पक्ष के सांसदों ने तुरंत विरोध दर्ज कराया। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने इस शब्द को असंसदीय बताते हुए इसे सदन की कार्यवाही से हटाने की मांग की। इसके बाद लोकसभा अध्यक्ष ने संबंधित टिप्पणी को रिकॉर्ड से हटाने का निर्देश दिया। इस पूरे घटनाक्रम के दौरान सदन में कुछ समय तक शोर-शराबा जारी रहा।
हंगामे के बीच राहुल गांधी ने कहा कि जैसे ही वह बोलना शुरू करते हैं, सत्ता पक्ष की ओर से विरोध शुरू हो जाता है। कांग्रेस नेता ने कहा कि उन्हें अपनी बात रखने का पूरा अधिकार है और लोकतंत्र में केवल एक पक्ष की आवाज नहीं सुनी जानी चाहिए। ये भी कहा कि संसद में हर जनप्रतिनिधि को अपनी राय रखने की स्वतंत्रता मिलनी चाहिए और स्वस्थ बहस लोकतंत्र की पहचान है।
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अपने भाषण के दौरान राहुल गांधी ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अनुपस्थिति का भी मुद्दा उठाते हुए आरोप लगाया कि छात्रों के खिलाफ हुई कार्रवाई के पीछे गृह मंत्रालय की भूमिका रही। साथ ही कहा भारत के गृहमंत्री को हिम्मत नहीं है कि यहां आएं और बैठें। मैंने उनकी कारकेड देखी। 30 गाड़ियां थीं, बुरी तरह से हिले हुए थे। गृहमंत्री डरे हुए हैं, इसलिए यहां नहीं हैं आज। बच्चों पर पैलेट मारे गए। उन्होंने आदेश दिया कि बच्चों को शॉक दिया जाए।
राहुल के इस बयान पर सत्ता पक्ष ने आपत्ति जताई और सदन में फिर से हंगामा शुरू हो गया। किरेन रिजिजू ने कहा कि बिना किसी तथ्य या प्रमाण के इस तरह के गंभीर आरोप लगाना उचित नहीं है।




















