जातिगत जनगणना न कराना है PDA के खिलाफ भाजपाई साजिश: अखिलेश

अखिलेश यादव

आरयू ब्यूरो, लखनऊ। यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने जनगणना की अधिसूचना में जाति का कॉलम न होने पर सवाल उठाया है। साथ ही कहा कि जातिगत जनगणना न कराना पीडीए (पिछड़ा दलित और अल्पसंख्यक) समाज के खिलाफ बीजेपाई साजिश है।

अखिलेश यादव ने आज अपने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट एक्स पर पोस्टकर कहा कि, “जनगणना की अधिसूचना में जाति का कॉलम तक नहीं है, गिनेंगे क्या? जातिगत जनगणना भी भाजपा का जुमला है। साथ ही
सपा नेता ने तंज कसते हुए कहा कि भाजपा का सीधा फार्मूला है-न गिनती होगी, न आनुपातिक आरक्षण- अधिकार देने का जनसांख्यिकीय आधार बनेगा।

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उन्होंने आगे कहा कि आज भाजपा पर भरोसा करनेवाले अपने को ठगा हुआ ही नहीं, बल्कि घोर अपमानित भी महसूस कर रहे हैं। भाजपा में जो कार्यकर्ता व नेता अब तक जातिगत जनगणना करवाने का दावा कर रहे थे, वो अब अपने समाज में मुंह दिखाने लायक नहीं बचे। वो अब गले से भाजपाई पट्टा और घरों, दुकानों, वाहनों से भाजपा का झंडा उतारने के लिए मजबूर हैं।

‘छलजीवी बीजेपी’ फिर कहेगी टाइपिंग मिस्टेक हुई

सपा सुप्रीमो ने आगे कहा कि पीडीए को अपने मान-सम्मान, आरक्षण और अधिकार की लड़ाई खुद लड़नी होगी। उन्होंने कहा कि अब जब विरोध होगा तो ‘छलजीवी बीजेपी’ फिर कहेगी कि ये टाइपिंग मिस्टेक हो गई। बीजेपी अब इतनी बुरी तरह एक्सपोज हो गई है कि सबको मालूम है कि वह अपने गलत मंसूबों के भंडाफोड़ के बाद आगे क्या करेगी। दरअसल ये बीजेपीई चालाक नहीं, बेशर्म हैं। सपा मुखिया ने कहा कि अब शब्दकोशों में ‘वचन-विमुखी’ बीजेपी का मतलब ‘धोखा’ लिख देना चाहिए।

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गौरतलब है कि जातीय जनगणना को लेकर विभिन्न राजनीतिक दल लगातार सरकार से सवाल उठाते रहे हैं। विशेष रूप से विपक्षी दलों के नेताओं ने समय-समय पर इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाते हुए केंद्र सरकार को घेरने का प्रयास किया है।

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