आरयू ब्यूरो, लखनऊ। यूपी की राजधानी लखनऊ में मंगलवार को बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर के अस्थि कलश को हटाए जाने की आशंका को लेकर राजनीतिक और सामाजिक माहौल गरमा गया। रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (आरपीआइ) के कार्यकर्ताओं ने विधानभवन के पास स्थित अंबेडकर महासभा परिसर में स्थापित अस्थिकलश के कथित विस्थापन के विरोध में जोरदार प्रदर्शन किया।
बड़ी संख्या में कार्यकर्ता हजरतगंज चौराहे से विधानभवन के सामने स्थित अस्थिकलश स्थल तक विरोध मार्च निकालने के लिए जुटे, लेकिन भारी पुलिसबल ने उन्हें रास्ते में ही रोक दिया। वहीं चेतावनी देते हुए कहा कि योगी सरकार इससे छेड़छाड़ करती है तो नौ अगस्त को लखनऊ में महाआंदोलन होगा।
प्रदर्शन के दौरान आरपीआइ कार्यकर्ताओं ने योगी सरकार और भाजपा के खिलाफ नारेबाजी की और स्पष्ट चेतावनी दी कि किसी भी कीमत पर बाबा साहब के अस्थिकलश को विस्थापित नहीं होने दिया जाएगा। आरपीआइ ने घोषणा की कि प्रदेशभर में ज्ञापन देकर विरोध दर्ज कराया जाएगा। इसके बावजूद सरकार ने अस्थिकलश से किसी प्रकार की छेड़छाड़ की तो नौ अगस्त को लखनऊ में बड़ा आंदोलन किया जाएगा।
भीमराव अंबेडकर केवल एक व्यक्ति नहीं,…
इस दौरान आरपीआइ प्रदेश अध्यक्ष पवन गुप्ता ने मीडिया से कहा कि डॉ. भीमराव अंबेडकर केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि देश के संविधान निर्माता और सामाजिक न्याय, समानता और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रतीक हैं। ऐसे में उनसे जुड़े किसी भी स्मारक या धरोहर के साथ लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। अस्थि कलश हमारे लिए आस्था का विषय है और हम हम अपनी आस्था से खिलवाड़ नहीं होने देंगे। साथ ही कहा कि पूरे भारत के लोगों की आस्था इस अस्थि कलश में है। इसके विस्थापन को बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं करेगें।
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1991 में स्थापित किया गया था अस्थिकलश
पवन गुप्ता ने कहा कि हम लोग अटल चौक पर स्थित बाबा साहब की प्रतिमा से बाबासाहब भीमराव अंबेडकर की कलश स्थल तक पैदल यात्रा निकालने जा रहे थे। मगर भारी पुलिस फोर्स लगाकर हमें रोक लिया गया। 1991 में बाबा साहब का अस्थि कलश विधानभवन के बगल में स्थापित किया गया था।




















