आरयू ब्यूरो, लखनऊ। लखनऊ में गांधी प्रतिमा पर बुधवार को सरकारी बस चालक-परिचालकों ने प्रदर्शन किया। दुबग्गा डिपो के संविदा परिचालकों ने हजरतगंज विधानसभा के पास पहुंचकर नारेबाजी की और अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन किया। वे विभिन्न मांगों को लेकर कई दिनों से दुबग्गा डिपो में कार्य बहिष्कार कर विरोध जता रहे थे, लेकिन उनकी समस्याओं पर कोई सुनवाई नहीं हुई, जिसके बाद उन्होंने हजरतगंज स्थित गांधी प्रतिमा पर प्रदर्शन करने का फैसला लिया। सूचना पर पहुंची पुलिस ने प्रदर्शनकारी परिचालकों को हिरासत में लेकर ईको गार्डन भेज दिया।
इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने मांग पूरी न होने पर आत्महत्या की चेतावनी दी है। साथ ही कहा कि दुबग्गा डिपो के संविदा कर्मचारियों का प्राइवेट कंपनी एसएस एंटरप्राइजेज में विलय किया जा रहा है, जो स्वीकार नहीं है और ये भी कहा कि कोई भी चालक या परिचालक को प्राइवेट कंपनी के साथ काम करना नहीं चाहता है। सिटी बसों में सेवा देने वाले लगभग 300 से अधिक परिचालक विगत कई दिनों से हड़ताल पर हैं। जिसकी वजह से शहर के 22 प्रमुख रूट पर चलने वाली सिटी बसें प्रभावित हो रही है।
वहीं प्रदर्शन कर रहे एक अन्य प्रदर्शनकारी ने कहा कि जब तक हम लोगों की मांग पूरी नहीं हो जाएगी यह विरोध चलता रहेगा। लगातार चालकों और परिचालकों के अधिकारों का हनन करने की कोशिश की जा रही है। हम लोग संविदा पर काम कर रहे हैं पहले से ही वेतन बहुत कम है और सुविधाएं शून्य। अब अगर प्राइवेट कंपनियों के हाथ में चले जाएंगे तो शोषण बढ़ जाएगा। इसलिए सभी परिचालक कार्य बहिष्कार करके सड़क पर उतरकर प्रदर्शन कर रहे हैं।
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प्रदर्शनकरियों ने कहा कि हम लोग की सुनवाई नहीं हो रही थी जिसके बाद हमारे कई साथी मुख्यमंत्री आवास आत्मदाह करने पहुंचे थे। उन्हें भी जेल भेज दिया गया है। हमारी मांग है कि सभी साथियों को छोड़ा जाए और मुकदमे वापस लिया जाए। यह सीधे तौर पर तानाशाही है कि जब हमारी भर्ती संविदा पर हुई थी तो प्राइवेट कंपनी में क्यों भेजा जा रहा है और विरोध करने पर हम सभी लोगों मुकदमे को धमकी दी जा रही है और कुछ साथियों को जेल भी भेज दिया गया।




















