आरयू ब्यूरो, लखनऊ। समाजवादी पार्टी के कद्दावर नेता मोहम्मद आजम खान और उनके बेटे पूर्व विधायक मोहम्मद अब्दुल्ला आजम के ड्यूल पैन कार्ड मामले से संबंधित जमानत याचिकाओं की सुनवाई से इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति विक्रम डी. चौहान ने खुद को अलग कर लिया। दोनों पुनरीक्षण याचिकाएं गुरुवार को टॉप-10 मामलों के रूप में सूचीबद्ध थीं।
पिछली सुनवाई में न्यायमूर्ति विक्रम डी. चौहान ने वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल एवं एन.आई. जाफरी और एडवोकेट शाश्वत आनंद व अंकुर आजाद की ओर से आजम खान एवं अब्दुल्ला आजम खान का पक्ष सुना था। वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने अंतरिम जमानत प्रार्थना पत्रों पर शीघ्र सुनवाई का अनुरोध करते हुए ये भी दलील दी थी कि दोनों पुनरीक्षणकर्ताओं को मामले में सम्मानपूर्वक बरी किया जाना चाहिए।
इसके बाद न्यायालय ने दोनों मामलों को छह अगस्त को टॉप-10 मामलों में सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया था। एडवोकेट शाश्वत आनंद ने बताया कि गुरुवार को न्यायालय की कार्यवाही प्रारंभ होने पर आजम खान और अब्दुल्ला आजम की ओर से मामले को सुनवाई के लिए लेने का मौखिक उल्लेख किया गया।
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इसी दौरान विक्रम डी. चौहान ने स्वयं को मामले की सुनवाई से अलग करते हुए निर्देश दिया कि दोनों पुनरीक्षण याचिकाओं को नई पीठ के गठन के लिए मुख्य न्यायाधीश के समक्ष प्रस्तुत किया जाए। इससे पहले 21 नवंबर 2025 को न्यायमूर्ति समीर जैन ने भी यतीमखाना प्रकरण से संबंधित मामलों की सुनवाई से स्वयं को अलग कर लिया था।



















