आरयू ब्यूरो, लखनऊ। राजधानी में 68,500 सहायक शिक्षक भर्ती में आरक्षण घोटाले का आरोप लगा आज एक बार फिर दलित-पिछड़े व दिव्यांग समेत अन्य वर्ग के अभ्यर्थियों ने प्रदर्शन किया। अभयर्थियों ने इस बार योगी सरकार में मत्स्य मंत्री संजय निषाद के आवास का घेराव किया। अभ्यर्थियों ने ‘आरक्षण घोटाला’ लिखी टोपी पहनी, सीटी बजाई और जमकर नारे लगाए। इस दौरान पुलिस और अभ्यर्थियों के बीच धक्का-मुक्की भी हुई। पुलिस ने जबरन अभ्यर्थियों को गाड़ी में भरकर ईको गार्डन भेज दिया।
प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि पुलिस ने उन्हें जबरन हटाया और उनके साथ बदसलूकी की। अभ्यर्थियों की मांग है कि 2018 की भर्ती में उन्हें आरक्षण का लाभ दिया जाए। साथ ही पांच प्रतिश छूट के आधार पर संशोधित चयन सूची जारी की जाए। अभ्यर्थियों ने कहा कि वे लंबे समय से नियुक्ति का इंतजार कर रहे हैं। इस दौरान चेतावनी देते हुए कहा कि इस बार उन्हें नियुक्ति मिलेगी या उनकी अर्थी उठेगी। प्रदर्शन के दौरान अभ्यर्थियों ने ‘ऐसी क्या मजबूरी है आरक्षण की चोरी है’ और ‘पिछड़ा आयोग ने माना है, आरक्षण घोटाला है’ जैसे नारे लगाए। जहां पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हटाने की कोशिश की, जिसस के बाद दोनों के बीच धक्का-मुक्की हुई। पुलिस ने सभी प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेकर इको गार्डन भेज दिया। प्रदर्शन में दिव्यांग अभ्यर्थी भी शामिल थे।
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प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों के मुताबिक साल 2018 में 68,500 सहायक शिक्षकों की भर्ती निकाली गई थी। इसमें दिव्यांग, भूतपूर्व सैनिक, अनुसूचित जाति और पिछड़ा वर्ग के अभ्यर्थियों को पांच प्रतिश की छूट का प्रावधान था। आरोप है कि इन चारों श्रेणियों के अभ्यर्थियों को इसका लाभ नहीं मिला और सामान्य अभ्यर्थियों के साथ ही परिणाम जारी कर दिया गया।
वहीं प्रदर्शन कर रहे एक अभ्यर्थिय पिछले आठ साल से नौकरी के लिए भटक का आरोप लगाते हुए कहा कि 68,500 सहायक शिक्षक भर्ती में बड़े स्तर पर आरक्षण में गड़बड़ी हुई है। राज्य और राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग ने भी आरक्षण में गड़बड़ी की बात मानते हुए नियमों का पालन करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि उनकी मांग है कि आयोग के आदेशों का पालन किया जाए। साल 2018 में भर्ती निकली थी और तभी उन्होंने आवेदन किया था। इसके बाद से नौकरी की उम्मीद में आठ साल से लगातार संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन अभी तक उन्हें नौकरी नहीं मिली है।




















