आरयू ब्यूरो, लखनऊ। भाजपा सरकार की कार्यप्रणाली को लेकर शनिवार को एक बार फिर यूपी के पूर्व सीएम अखिलेश यादव ने बीजेपी पर हमला बोला है। अखिलेश ने कहा है कि भाजपा के कुशासन से समाज का हर वर्ग बुरी तरह त्रस्त है, जबकि भाजपा चारों तरफ भ्रम फैलाकर अपना स्वार्थ साधना चाहती है पर अब लोग उसमें फंसने वाले नहीं है।
किसानों के मुद्दे को लेकर सपा अध्यक्ष ने बीजेपी सरकार पर निशाना साधते हुए आज अपने एक बयान में कहा है कि किसान अपने अस्तित्व की रक्षा के लिए सड़क पर संघर्ष कर रहे हैं। कृषि विरोधी कानूनों के जरिए किसान को अपनी खेती से बेदखल करने और पूंजी घरानों की मर्जी पर उसकी जिंदगी बंधक बनाने की साजिशों का देशव्यापी विरोध हो रहा, जबकि किसानों के साथ जनसामान्य भी तमाम परेशानियों से गुजर रहा।
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हमला जारी रखते हुए अखिलेश ने कहा कि आज भी यह स्थिति है कि कर्ज के बोझ तले दबकर किसान आत्महत्या कर रहा। अखिलेश ने उदाहरण देते हुए कहा है कि बांदा के गिरवा थाना क्षेत्र स्थित बरई मानपुर गांव में कर्ज से बदहाल 55 वर्षीय किसान गोविंद ने फांसी लगाकर जान दे दी। वहीं आजमगढ़ में क्रय केंद्रों पर कभी बोरे की कमी तो कभी धान की उठान न होने से किसान परेशान है। शासन-प्रशासन के न्यूनतम समर्थन मूल्य और डेढ़ गुना उत्पादन लागत दिलाने के दावे झूठे साबित हो रहे हैं, जबकि डॉ. स्वामी नाथन की सिफारिशें भी लागू नहीं की गई। तथाकथित कृषि सुधारों के प्रति अविश्वास घर कर गया है।
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अखिलेश ने दावा करते हुए कहा कि अब किसान अपनी समस्याओं का तत्काल समाधान और जवाब चाहता है। लोकतंत्र में उनके साथ अलोकतांत्रिक व्यवहार क्यों किया जा रहा है? भाजपा सरकार किसानों से लम्बी वार्ता षडयंत्र के तहत कर रही, लेकिन इससे वह आंदोलन को कमजोर नहीं कर पाएगी क्योंकि देश किसानों के साथ है।




















