नेपाल में बाढ़ के बाद यूपी में बढ़ा महासंकट, वैज्ञानिकों ने दी चेतावनी

नेपाल में बाढ़
नेपाल में बाढ़ से मची तबाही।

आरयू वेब टीम। नेपाल और तिब्बत सीमा पर हुई भीषण प्राकृतिक आपदा का असर अब उत्तर प्रदेश के तराई और मैदानी इलाकों में महासंकट की स्थिति पैदा होगा। नेपाल की नदियों से बहकर आने वाला पानी सीधे तौर पर यूपी की प्रमुख हिमालयी नदियों से जुड़ता है। वैज्ञानिकों के अनुसार नेपाल में आई बाढ़ अपने साथ लाखों टन गाद और भारी मलबा लेकर आ रही है, जो नदियों के तल को भर रहा है। इससे आने वाले दिनों में यूपी के निचले इलाकों में बाढ़ का दायरा और भयावहता काफी बढ़ सकती है।

वैज्ञानिकों का कहना है कि नेपाल में लांगतांग लिरुंग हिमस्खलन के बाद टूटे प्राकृतिक बांधों का पानी अब भारतीय सीमा की ओर तेजी से अग्रसर है। शारदा, घाघरा, राप्ती और रोहिणी जैसी नदियां पहले ही उफान पर हैं। यदि नेपाल के ऊपरी इलाकों में फिर से बारिश या जलभराव की स्थिति बनती है, तो यूपी के तराई जिलों को अत्यधिक जलप्रलय का सामना करना पड़ सकता है। नदी वैज्ञानिक इसे केवल मौसमी बाढ़ न मानकर एक बड़ा भूगर्भीय और पारिस्थितिकी संकट मान रहे हैं।

वहीं नेपाल की आपदा के प्रभाव से उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती और तराई जिले सबसे ज्यादा संवेदनशील हो गए हैं।लखीमपुर खीरी, बहराइच, श्रावस्ती, बलरामपुर, सिद्धार्थनगर, महाराजगंज और कुशीनगर जैसे जिलों में प्रशासन को विशेष निगरानी बरतने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही तटीय गांवों और निचले क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को चेतावनी जारी की जा रही है कि वे नदियों के पास न जाएं और जरूरत पड़ने पर सुरक्षित राहत शिविरों में स्थानांतरित हो जाएं।

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पर्यावरण विशेषज्ञों और वैज्ञानिकों ने जोर देकर कहा है कि सीमा पर स्थित बैराजों जैसे गिरजापुरी, शारदा और वाल्मीकि नगर बैराज पर पानी और मलबे के प्रवाह की 24×7 मॉनिटरिंग जरूरी है। यदि नेपाल की ओर से मलबे का भारी सैलाब आता है, तो बैराजों के दरवाजों को सही समय पर नियंत्रित करना होगा, वरना अचानक से बड़ी तबाही मच सकती है। आपदा प्रबंधन विभाग को रियल-टाइम डेटा ट्रैकिंग का इस्तेमाल करने की सलाह दी गई है।

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