राहुल गांधी का मोदी सरकार पर निशाना, ‘आदिवासियों को जानवरों जैसा समझते हैं भाजपा नेता’, वनवासी शब्‍द को बताया अपमानजनक

वनवासी
जनसभा को संबोधित करते राहुल गांधी।

आरयू वेब टीम। छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के मद्देनजर कांग्रेस नेता और वायनाड से सांसद राहुल गांधी ने शनिवार को राज्य के बस्तर जिले के जगदलपुर में रैली की। राहुल गांधी ने यहां मोदी सरकार पर निशाना साधने के साथ ही कहा कि भाजपा के नेता आदिवासियों को वनवासी कहते हैं और जानवर जैसा समझते हैं। उन्होंने आगे कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, भाजपा और आरएसएस के लोगों ने एक नया शब्द निकाला है, वह लोग आदिवासियों के लिए वनवासी शब्द का उपयोग करते हैं।

राहुल गांधी ने कहा आदिवासी और वनवासी में अंतर बताते हुए कहा कि आदिवासी का मतलब देश के पहले और असली मालिक से है। उन्होंने कहा कि यानी इस देश की जमीन जंगल जो कभी आपकी हुआ करती थी, आज उसको आप से ले लिया गया है। राहुल गांधी ने कहा कि भाजपा कभी इस बारे में बात नहीं करती है, क्योंकि उन्हें ये सब आपको लौटाना पड़ेगा। इसलिए उन्होंने यह शब्द निकाला है। राहुल गांधी ने कहा कि वनवासी यानी जानवरों की तरह वन में रहने वाला। यह शब्द अपमानजनक है, कांग्रेस इसको स्वीकार नहीं करती है।

जानबूझकर वनवासी शब्द का करते हैं उपयोग

हमला जारी रखते हुए राहुल ने कहा कि अभी एक वीडियो भी वायरल हुआ था, जिसमें एक आदिवासी के ऊपर पेशाब किया गया और फिर उस वीडियो को वायरल किया गया। राहुल ने कहा कि पेशाब करने वाला शख्स भाजपा का नेता ही था। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा के नेता आदिवासियों को जानवर से भी बदतर समझते हैं। उन्होंने कहा कि इस वजह से ही वह जानबूझकर आदिवासी लोगों के लिए वनवासी शब्द का उपयोग करते हैं।

अडानी छीनते हैं जमीन, भाजपा सरकार चलवाती हैं गोलियां

राहुल ने मोदी सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि मोदी जी क्या करते हैं? वह कहते हैं अपनी जमीन अडानी जी को दे दो? अडानी जी आपकी जमीन छीन लेते हैं और जब आप विरोध करते हैं तो भाजपा सरकार आप पर गोलियां चलवाती है। अडानी जी आपकी जमीन और खदानों पर कब्जा कर लेते हैं।

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शब्द तो बदल लिए हैं लेकिन...

कांग्रेस नेता ने सवाल किया कि क्या उन्होंने कभी किसी भाजपा के नेता को किसी जानवर के ऊपर पेशाब करते हुए देखा है, लेकिन आपने उन्हें आदिवासियों पर पेशाब करते हुए देखा है। गांधी ने कहा कि पहले मोदी जी अपने भाषणों में वनवासी शब्द का इस्तेमाल करते थे, लेकिन अब इस शब्द से परहेज करते हैं। उन्होंने अपने शब्द तो बदल लिए हैं, लेकिन अपनी सोच नहीं बदल सकते। उनकी सोच अब भी आदिवासियों का अपमान करने की है।

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