आरयू ब्यूरो, लखनऊ। प्रयागराज में माघ मेले में मौनी अमावस्या पर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वररानंद को अपमानित करने के बाद उठे विवाद पर राजनीतिक बयानबाजी का दौर जारी है। कांग्रेस, सपा और आप के बाद अब बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती की भी प्रतिक्रिया सामने आई है। मायावती ने प्रयागराज में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और प्रशासन में जारी विवाद के बीच शनिवार को कहा कि संकीर्ण राजनीतिक स्वार्थ के लिए धर्म को राजनीति से और राजनीति को धर्म से जोड़ने के कई खतरे हमेशा बने रहते हैं।
बसपा प्रमुख ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि उत्तर प्रदेश ही नहीं, बल्कि देश के अन्य राज्यों में भी किसी भी धर्म के पर्व, त्योहार, पूजा-पाठ और स्नान आदि में राजनीतिक लोगों का हस्तक्षेप और प्रभाव पिछले कुछ वर्षों में काफी बढ़ गया है। ‘‘यह हस्तक्षेप नए-नए विवाद, तनाव और संघर्ष का कारण बन रहा है, जो उचित नहीं है, और इसी वजह से लोगों में दुख व चिंता की लहर स्वाभाविक है।”
मायावती ने कहा, ‘‘वास्तव में संकीर्ण राजनीतिक स्वार्थ के लिए धर्म को राजनीति से तथा राजनीति को धर्म से जोड़ने के खतरे हमेशा बने रहते हैं। प्रयागराज में स्नान आदि को लेकर जारी विवाद, एक-दूसरे का अनादर और आरोप-प्रत्यारोप इसका ताजा उदाहरण है। इससे हर हाल में बचा जाना ही बेहतर होगा।
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बसपा मुखिया ने कहा, ‘‘वैसे भी देश का संविधान और कानून ईमानदारी से जनहित और जनकल्याणकारी कर्म को ही वास्तविक राष्ट्रीय धर्म मानते हैं और राजनीति को धर्म से तथा धर्म को राजनीति से दूर रखने की बात करते हैं।” बसपा प्रमुख ने कहा कि इस सोच पर सही नीयत और नीति के साथ अमल होना चाहिए, ताकि नेता बिना किसी द्वेष और पक्षपात के, सर्व समाज के सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक हित में अपने संवैधानिक दायित्वों का ईमानदारी और निष्ठा के साथ निर्वहन कर सकें।
मायावती ने कहा कि मौजूदा हालात में भी लोगों की यही अपेक्षा है, इसलिए प्रयागराज में स्नान को लेकर जारी विवाद आपसी सहमति से जितनी जल्दी सुलझ जाए, उतना ही बेहतर होगा। साथ ही बसपा सुप्रीमो ने उत्तर प्रदेश स्थापना दिवस के अवसर पर सभी लोगों को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दीं।



















