आरयू ब्यूरो, लखनऊ। अवैध निर्माण को संरक्षण देने वाले लखनऊ विकास प्राधिकरण के घूसखोरी कांड का विजिलेंस के खुलासे के बाद अवैध निर्माण की ठेकेदारी के एक दूसरे स्वरूप पर रोक लग सकती है। इंजीनियर-अफसर व अवैध निर्माणकर्ताओं की जुगलबंदी से चल रहे करोड़ों के अवैध निर्माण को मात्र कुछ हजार के खर्च से संरक्षण देने वाले कंपाउंडिंग आवेदन के खेल पर भी ब्रेक लगाने का खाका खीचा गया है। लखनऊ विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने आज अवैध निर्माण को बचाने वाले शमन आवेदनों की समीक्षा करने के बाद अधिकारियों को इस तरह के खेल पर रोक लगाने का निर्देश दिया है।
बिल्डर बचे नहीं , लेकिन इंजीनियर-अफसर…
मंगलवार को इस बारे में एलडीए की ओर से कहा गया है कि लखनऊ में नियमों के विपरीत निर्माण करा रहे बिल्डर अब शमन आवेदन की आड़ लेकर बच नहीं पाएंगे। प्राधिकरण ऐसे बिल्डरों व भवन स्वामियों को चिन्हित करेगा, जिन्होंने शमन के लिए आवेदन तो कर दिया, लेकिन उसके बाद न तो निर्धारित शुल्क जमा किया और न ही सही तरीके से मानचित्र जमा किया।
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हालांकि एक बार फिर एलडीए अवैध निर्माण को संरक्षण देने वाले अपने ऐसे अफसर-इंजीनियरों पर नकेल कसने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठा सका जो बिल्डर के कंपाउंडिंग आवेदन को ढाल बनाकर आम जनता व राहगीरों के लिए सरदर्द बनने वाले अवैध निर्माण को बढ़ावा दे रहें हैं। इससे न सिर्फ सूबे की राजधानी लखनऊ की सूरत बिगड़ रही, बल्कि यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ से सीधे जुड़े विभाग की छवि भी धूमिल हो रही है।
मानचित्र सेल में भी कम कलाकार नहीं!
वहीं कई बार एलडीए में यह भी सामने आ चुका है कि प्रवर्तन में तैनात इंजीनियर से लेकर जोनल अफसर तक नये-पुराने अवैध निर्माण को संरक्षण देने के लिए शमन के लिए खुद ही आवेदन करवाते हैं। इसके बाद मानचित्र सेल के कुछ चर्चित इंजीनियर इन आवेदन को लंबे समय तक लटकाकर निर्माण पूरा कराने में अपनी भूमिका अदा करते हैं। इस बीच अवैध निर्माण परवान चढ़ता रहता है और प्रवर्तन के अफसर-इंजीनियरों को भी मामला पेंडिंग बताकर अवैध निर्माण पर कार्रवाई नहीं करने का बहाना मिल जाता है।
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दूसरी ओर एलडीए का कहना है कि आज उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने शमन के जोन वार पेंडिंग मामलों की समीक्षा की। इसमें पाया गया कि प्रवर्तन के जेई द्वारा नोटिस काटने पर कुछ बिल्डरों ने शमन मानचित्र के लिए ऑनलाइन आवेदन तो कर दिया, लेकिन उसके बाद आगे की प्रक्रिया में किसी तरह की दिलचस्पी नहीं दिखायी। कुछ मामलों में अधिकारियों के संपर्क करने पर भी अवैध निर्माणकर्ता लंबे समय से टालमटोल का रवैया अपनाये हुये हैं। वहीं अवैध निर्माणकर्ताओं की तमाम टालमटोल के बाद भी मानचित्र सेल व प्रवर्तन के इंजीनियर और अधिकारी भी अवैध निर्माण पर आगे की कार्रवाई नहीं कर रहें हैं।
अवैध निर्माण वालों पर करो तत्काल कार्रवाई
उपाध्यक्ष ने ऐसे समस्त मामलों को चिन्हित कर संबंधित भवन स्वामियों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई करने के अधिकारियों को आज निर्देश दिये हैं। जिसके अंतर्गत एक सप्ताह के अंदर अभियान चलाकर ऐसे निर्माण कार्यों को सील किया जाएगा। साथ ही विहित प्राधिकारी न्यायालय में पैरवी करके नियमानुसार ध्वस्तीकरण की कार्रवाई सुनिश्चित करायी जाएगी।
चेतावनी से भगदड़ मचना तय
दूसरी ओर एलडीए की इस चेतावनी के बाद करोड़ों से अरबों रूपये तक के अवैध निर्माण कराने वाले बिल्डरों का तेजी से एलडीए के सबसे छोटे इंजीनियर से लेकर सबसे बड़े अधिकारी तक के आसपास चक्कर लगाने की पूरी उम्मीद जताई जा रही है। ऐसे में कुछ शातिर इंजीनियर और अधिकारियों द्वारा अवैध निर्माण पर कार्रवाई वाली इस चेतावनी का गलत फायदा भी उठाने से इंकार नहीं किया जा सकता है।
भवन मालिक खरीदना चाहते हैं FAR
समीक्षा बैठक में पाया गया कि शमन के कुछ मामलों में भवन मालिक नियमानुसार फ्लोर एरिया रेशियो (FAR) खरीदने पर सहमत हैं और समस्त शुल्क जमा करना चाहते हैं। इस पर उपाध्यक्ष ने निर्देश दिये कि सही मामलों में बिना देर किये निस्तारण करते हुए शमन मानचित्र जारी किया जाए। जिससे कि भवन स्वामियों को बेवजह परेशान न होना पड़े।
लैंडयूज चेंज कराने वालों का जल्दी होगा काम
उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने कहा कि भू-उपयोग परिवर्तन के मामलों में समाचार पत्रों में विज्ञापन प्रकाशित करके आपत्ति-सुझाव आमंत्रित किये जाते हैं। इसमें लोग प्रार्थना पत्र के माध्यम से आपत्ति-सुझाव दर्ज कराते हैं। निर्धारित अवधि पूरी होने पर आपत्ति-सुझाव संकलित करने में पत्रावली कई पटलों पर जाती है, जिसमें अनावश्यक समय लगता है। ऐसे में अब से लोगों को एलडीए की वेबसाइट के माध्यम से ऑनलाइन आपत्ति-सुझाव दर्ज करने की सुविधा प्रदान की जाएगी। इसमें लोग टिप्पणी के साथ संबंधित दस्तावेज भी अटैच कर सकेंगे।
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सुकून पसंद जनता की बढ़ेगी तेजी से मुश्किलें
प्राधिकरण के ऑनलाइन वाले इस फैसले के बाद जहां होटल, अस्पताल, अपार्टमेंट, काम्प्लेक्स बनाने वाले आवासीय प्लॉट पर और तेजी से अपना धंधा फैला सकेंगे। वहीं व्यापार का केंद्र बनने वाली इन इमारतों के आसपास अपने घर में रहने वाली अमन पसंद आम जनता की दिक्कतें बढ़ेंगी, हालांकि प्राधिकरण के अधिकारी तेजी से खजाने भी भर सकेंगे एलडीए का।
समीक्षा बैठक में एलडीए उपाध्यक्ष के अलावा अपर सचिव सीपी त्रिपाठी व अंडर ट्रांसफर अपर सचिव ज्ञानेंद्र वर्मा के अलावा प्रवर्तन के सातों जोन के जोनल अधिकारी व अन्य अफसर-इंजीनियर मौजूद रहें।



















