आरयू ब्यूरो, लखनऊ। समाजवादी पार्टी के पूर्व विधायक दीप नारायण सिंह यादव की मुश्किलें बढ़ गई हैं। प्रवर्तन निदेशालय ने उनके और उनके पारिवारिक सदस्यों के लखनऊ और झांसी से जुड़े कई ठिकानों पर छापेमारी की है। ईडी ने ये कार्रवाई यूपी विजिलेंस एस्टेब्लिशमेंट की एफआइआर के आधार पर की है। ईडी ने छापेमारी के दौरान कई दस्तावेज, डिजिटल डिवाइस और संपत्तियों से जुड़े रिकॉर्ड जब्त किए।
जानकारी के मुताबिक जांच टीम सुबह दीप नारायण के ठिकानों पर पहुंची। जहां ईडी ने पूर्व विधायक और उनके परिवार के सदस्यों और उनसे जुड़ी कंपनियों व अन्य लोगों के आवासीय और व्यावसायिक परिसरों की तलाशी ले। छापेमारी के दौरान एजेंसी को कई अहम दस्तावेज, डिजिटल डिवाइस और चल-अचल संपत्तियों व वित्तीय लेनदेन से जुड़े रिकॉर्ड मिले हैं। ईडी इन दस्तावेजों की जांच कर अपराध से अर्जित संपत्तियों और मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क का पता लगाने में जुटी है। जांच एजेंसी ने कहा है कि मामले में पीएमएलए के तहत आगे की जांच जारी है।
ईडी के अनुसार, मामले में पीएमएलए के तहत अनुसूचित अपराधों से जुड़ी 23 से अधिक एफआइआर शामिल हैं। वहीं शुरुआती जांच में पूर्व विधायक और उनके सहयोगियों के खिलाफ करीब कई मामले सामने आए हैं। इनमें प्रमुख तौर पर धोखाधड़ी, जालसाजी, रंगदारी, हत्या के प्रयास, डकैती, यूपी गैंगस्टर्स एक्ट और गुंडा एक्ट सहित कई गंभीर धाराओं में मामले दर्ज हैं।
कांग्रेस से शुरू हुई राजनीत
21 जुलाई 1969 को झांसी में जन्में दीप नारायण के राजनीतिक करियर की शुरुआत एक छात्र नेता के रूप में हुई। कांग्रेस छात्र संगठन एनएसयूआइ के टिकट पर उन्होंने बुंदेलखंड इंटर कॉलेज से छात्रसंघ का चुनाव जीता। 1992 में बुंदेलखंड कॉलेज के छात्रसंघ अध्यक्ष बने। इसी दौरान मुलायम सिंह यादव के संपर्क में आए और समाजवादी पार्टी में शामिल हो गए।
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1991 में दीप नारायण समाजवादी युवजन सभा के झांसी जिला अध्यक्ष बने। इसके करीब दो साल बाद वो झांसी जिला सहकारी बैंक के अध्यक्ष बने और इस पद पर वो 1998 तक रहे। सपा में उन्होंने जिलाध्यक्ष, प्रदेश सचिव, लोहिया वाहिनी के प्रदेश और राष्ट्रीय अध्यक्ष जैसे पदों की कमान संभाली। 2007 में झांसी के गरौठा विधानसभा सीट से सपा के टिकट पर पहली बार विधायक चुने गए। 2012 में दोबारा जीते। मगर 2017 के विधानसभा चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा।




















