अब मायावती ने कहा, “रामचरितमानस-मनुस्मृति नहीं, संविधान है उपेक्षित वर्गों का ग्रंथ”, अखिलेश पर भी साधा निशाना

रामचरितमानस
फाइल फोटो।

आरयू ब्यूरो, लखनऊ। यूपी की राजनीति में रामचरितमानस पर दिए गए बयान के बाद से विवाद लगातार गहराता जा रहा है। अब बसपा सुप्रीमो मायावती ने रामचरितमानस प्रकरण को लेकर शुक्रवार को प्रतिक्रिया देते हुए अखिलेश यादव को निशाने पर लिया है। मायावती ने कहा कि देश में कमजोर और उपेक्षित वर्गों के लिए रामचरित मानस व मनुस्मृति ग्रंथ नहीं है। उनका ग्रंथ भारतीय संविधान है।

मायावती ने आज एक के बाद एक चार ट्वीट कर सपा मुखिया के साथ ही अन्य विरोधियों को निशाने पर लिया। बसपा सुप्रीमो ने अखिलेश पर हमला बोलते हुए कहा कि देश में कमजोर व उपेक्षित वर्गों का रामचरितमानस व मनुस्मृति आदि ग्रंथ नहीं बल्कि भारतीय संविधान है, जिसमें बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर ने इनको शूद्रों की नहीं बल्कि एससी, एसटी व ओबीसी की संज्ञा दी है। अतः इन्हें शूद्र कहकर सपा इनका अपमान न करे तथा न ही संविधान की अवहेलना करे।

अपने दूसरे ट्वीट में बसपा प्रमुख ने सपा के साथ ही कांग्रेस और भाजपा को भी निशाने पर लेते हुए कहा कि देश के अन्य राज्यों की तरह यूपी में भी दलितों, आदिवासियों व ओबीसी समाज के शोषण, अन्याय, नाइन्साफी तथा इन वर्गों में जन्मे महान संतों, गुरुओं व महापुरुषों आदि की उपेक्षा एवं तिरस्कार के मामले में कांग्रेस, भाजपा व समाजवादी पार्टी भी कोई किसी से कम नहीं।

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वहीं गेस्‍ट हाउस कांड को आज एक बार फिर याद करते अपने तीसरे ट्वीट में मायावती ने कहा कि सपा प्रमुख द्वारा इनकी वकालत करने से पहले उन्हें लखनऊ स्टेट गेस्ट हाउस के दिनांक दो जून 1995 की घटना को भी याद कर अपने गिरेबान में जरूर झांककर देखना चाहिए, जब सीएम बनने जा रही एक दलित की बेटी पर सपा सरकार में जानलेवा हमला कराया गया था।

बाकी पार्टियां वोट के स्वार्थ में करती हैं नाटकबाजी

अपने आखिरी ट्वीट में बसपा मुखिया ने कहा कि वैसे भी यह जगजाहिर है कि देश में एससी, एसटी, ओबीसी, मुस्लिम व अन्य धार्मिक अल्पसंख्यकों आदि के आत्म-सम्मान एवं स्वाभिमान की कद्र बीएसपी में ही हमेशा से निहित व सुरक्षित है, जबकि बाकी पार्टियां इनके वोटों के स्वार्थ की खातिर किस्म-किस्म की नाटकबाजी ही ज्यादा करती रहती हैं।

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बता दें कि समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने शूद्र विधानसभा में सीएम योगी से सवाल पूछने की बात कही थी। अखिलेश यादव ने कहा था कि हमारे सीएम एक ऐसी संस्था से आए हैं जिसका एक इतिहास रहा है। रामचरितमानस और शूद्र के बारे में वो सदन में बताएं। ये धार्मिक लोगों का सवाल है। उन्होंने कहा था कि हम तो भगवान विष्णु के सभी अवतारों को मानते है। जिस शब्द को लेकर बवाल मचा है उसे लेकर सभी को बोलना चाहिए।

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