लखनऊ का सबसे बड़ा अग्निकांड कराने वाले अवैध निर्माण को बचाने वाला LDA का पेशकार निलंबित, 24 दिन बाद हुई कार्रवाई

जानलेवा बिल्डिंग
अलीगंज अग्निकांड में जान गंवाने वाली छात्रा की लाश ले जाते पुलिसकर्मी। (फाइल फोटो)

आरयू ब्‍यूरो, लखनऊ। 15 बेगुनाह युवक-युवतियों की जान लेने वाले अ‍लीगंज अग्निकांड में लखनऊ विकास प्राधिकरण ने अपने एक और कर्मी पर कार्रवाई की है। अलीगंज के जानलेवा अवैध निर्माण को बचाने में दस साल पहले भूमिका निभाने वाले पेशकार को अब एलडीए ने गुपचुप ढंग से निलंबित कर दिया है।

संवेदनशील इंसानों को दहला देने वाले अग्निकांड के 24 दिन बाद निलंबन की यह कार्रवाई दस साल पहले जोन चार के विहित प्राधिकारी कोर्ट में तैनात रहे विमलेश गौतम पर एलडीए उपाध्‍यक्ष प्रथमेश कुमार ने की है। वर्तमान में भी प्राधिकरण के अधिकारियों ने विमलेश कुमार को विहित प्राधिकारी न्यायालय (जोन सात) में तैनात कर रखा था। निलंबन के बाद जहां से उसे हटाते हुए उपाध्‍यक्ष ने अधिष्‍ठान से अटैच कर दिया है।

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निलंबन के एक दिन बाद गुरुवार को इस मामले के सामने आने के बाद एलडीए के बड़े अधिकारियों से लेकर कर्मी तक मुंह खोलने से बचते रहें। वहीं सूत्रों का कहना है कि अलीगंज के सेक्‍टर डी. स्थित वीरेंद्र शुक्‍ला व सुरेंद्र शुक्‍ला की अवैध बिल्डिंग को विहित प्राधिकारी दुर्गेश श्रीवास्‍तव ने जिस समय (दस मई 2016) को गिराने व करीब ड़ेढ महीने बाद (पांच जुलाई 2016) अपने ही आदेश को निरस्‍त करने का फैसला लिया था, उस समय विमलेश कुमार पेशकार के रूप में जोन चार में तैनात था।

सरकारी रेकॉर्ड से हुई छेड़छाड़

इस मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आयी है कि रेकॉर्ड के अनुसार वीरेंद्र शुक्‍ला ने अपनी अवैध बिल्डिंग बचाने के लिए जो प्रत्‍यावेदन विहित प्राधिकारी को दिया था उसमें आने वाले साल यानि 2017 की डेट लिखी थीं। एलडीए अधिकारियों को आशंका है कि विमलेश कुमार ने अवैध निर्माणकर्ताओं से मिलीभगत करते हुए रेकॉर्ड से छेड़छाड़ की थीं। साथ ही इस बेहद गंभीर मामले का ओएसडी संगीता राधव को जांच अधिकारी नामित करते हुए वीसी ने आगे की कार्रवाई करने का निर्देश दिया है।

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उल्‍लेखनीय है कि बाबू विमलेश गौतम से पहले एलडीए ने अलीगंज क्षेत्र में प्रवर्तन के जेई के साथ तैनात रहे बेलदार (चतुर्थ श्रेणी कर्मी) हरिपाल यादव को निलंबित किया था। वहीं शासन स्‍तर से प्रवर्तन जोन चार में तैनात रहे एलडीए के चार इंजीनियरों को अब तक निलंबित किया जा चुका है।

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वहीं सीएम की ओर से तय की गयी एसआइटी की जांच पूरी होने के बाद अवैध बिल्डिंग पर नोटिस की कार्रवाई होने (अगस्‍त 2014) से अग्निकांड होने (22 जून 2026) तक प्रवर्तन जोन चार व एलडीए में तैनात रहे अग्निकांड के लिये जिम्‍मेदार अफसर-इंजीनियरों पर कई दिनों से कार्रवाई की तलवार लटकने की बात सामने आ रही। दूसरी ओर 15 परिवारों को कभी नहीं भरने वाल जख्‍म देने वाले अलीगंज अग्निकांड के दोषियों पर कार्रवाई में देर होने से अब एलडीए के बाद शासन में बैठे अफसरों की मंशा व क्षमता पर भी धीरे-धीरे सवाल उठने लगे हैं।

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