मस्जिद ध्वस्तीकरण पर इमरान प्रतापगढ़ी ने योगी सरकार पर मुसलमानों को निशाना बनाने का लगाया आरोप

इमरान प्रतापगढ़ी
इमरान प्रतापगढ़ी। (फाइल फोटो)

आरयू ब्यूरो, लखनऊ। सहारनपुर जिले में कलेक्ट्रेट परिसर स्थित करीब सौ साल पुरानी मस्जिद को शनिवार को ढहाने की कार्रवाई पर योगी सरकार विपक्ष के निशाने पर आ गई  है। प्रशासन की इस कार्रवाई पर कांग्रेस नेता और राज्यसभा सांसद इमरान प्रतापगढ़ी ने योगी सरकार पर करारा हमला बोला है। साथ ही सरकार पर चुनाव से पहले जानबूझकर मुसलमानों को निशाना बनाने और विकास के मुद्दों से ध्यान भटकाने का आरोप लगाया है।

इमरान प्रतापगढ़ी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पोस्टकर  इस कार्रवाई का विरोध जताते हुए प्रतिक्रिया दी है। कांग्रेस नेता ने कहा कि आज सहारनपुर कलेक्ट्रेट में बनी मस्जिद को भी अवैध बताकर गिरा दिया गया। अगर सरकार सौ साल पुरानी मस्जिदों को भी अवैध मानती है तो फिर इस देश में सब-कुछ अवैध है। वहीं इमरान ने तंज कसते हुए कहा कि विकास प्राधिकरण के गठन से पहले बना जवाहर विश्वविद्यालय इन्हें अवैध लगता है और कलेक्ट्रेट के गठन से पहले बनी ब्रिटिश काल की मस्जिद भी अवैध लगती है। आज सरकार की नजर में हर मुसलमान अवैध हो गया है।

इस दौरान कांग्रेस सांसद ने सरकार की नीयत पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि ये खेल आखिर कब तक चलेगा? अगर हमारे ही देश के नागरिकों और उनके पूजा स्थलों को सरकारी साजिश के तहत गिराया जाए तो फिर कहने को क्या बचेगा? ये सिर्फ एक दिन का मामला नहीं है बल्कि यह इस सरकार की रोजमर्रा की दिनचर्या बन गई है। उन्होंने आगे कहा कि जो सरकार छात्रों के मुद्दों पर बुरी तरह घिरी हुई है वह चुनाव से पहले यही सब करेगी। यह सरकार विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली, पानी और सड़कों के नाम पर जनता से वोट मांगने के लायक नहीं बची है। तो क्या अब वे मस्जिदों को गिराकर और मुसलमानों पर अत्याचार करके जनता से वोट मांगेंगे?

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गौरतलब है कि सहारनपुर के कलेक्ट्रेट परिसर में 3000 स्क्वायर फीट में बनी यह मस्जिद करीब सौ साल पुरानी बताई जाती है। दस फरवरी, 2025 को बजरंग दल के पूर्व प्रांत संयोजक विकास त्यागी ने इसे अवैध बताते हुए डीएम से शिकायत की थी। उनका आरोप था कि मस्जिद परिसर के कमरों और डाकघर से अवैध किराया वसूला जा रहा है। 16 जुलाई, 2026 को नगर मजिस्ट्रेट कोर्ट ने इसे अवैध मानते हुए हटाने और 6.41 करोड़ रुपये का हर्जाना वसूलने का आदेश दिया था।

इसके खिलाफ मस्जिद पक्ष ने 20 जुलाई को जिला कोर्ट में याचिका दायर की, लेकिन दो सितंबर को जिला जज ने सिटी मजिस्ट्रेट के आदेश को बरकरार रखते हुए याचिका खारिज कर दी। इसी के बाद शनिवार भोर में चार बजे से छह जेसीबी की मदद से मस्जिद ढहाने की कार्रवाई शुरू की गई।

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