आरयू ब्यूरो, लखनऊ। समाजवादी पार्टी के कद्दावर नेता और पूर्व मंत्री आजम खान को शनिवार को रामपुर की एमपी-एमएलए मजिस्ट्रेट कोर्ट ने बड़ा झटका दिया है। 2019 लोकसभा चुनाव के दौरान तत्कालीन अधिकारियों को तनखइया (सैलरी लेने वाला) कहने वाले बयान केस में कोर्ट ने उन्हें दोषी करार देते हुए दो साल की सजा और पांच हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
दरअसल ये मामला रामपुर के भोट थाना क्षेत्र से जुड़ा है। 2019 लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान आजम खान ने एक रोड शो/रैली में तत्कालीन जिलाधिकारी (डीएम) और सरकारी अधिकारियों को लेकर टिप्पणी की थी, जिसमें कहा था कि सभी लोग डटे रहो, ये कलेक्टर-पलेक्टर से मत डरो। ये तनखइया है और तनखैयों से डरा नहीं जाता। मायावती की फोटोज देखी है न, कैसे बड़े-बड़े अफसर रुमाल निकालकर जूते साफ करते थे। उनसे ही गठबंधन है, इस बयान का का वीडियो तेजी से वायरल हुआ था।
इस बयान से चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन होने का आरोप लगाते हुए भोट थाने में मुकदमा दर्ज किया गया था। चुनाव आयोग ने भी संज्ञान लिया और रिपोर्ट तलब की थी। मामले की जांच के बाद चार्जशीट दाखिल की गई और एमपी-एमएलए कोर्ट में ट्रायल चला। चार मई को बहस पूरी होने के बाद आज फैसला सुनाया गया।
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आजम खान पहले से ही रामपुर जेल में बंद हैं। उनके और बेटे अब्दुल्ला आजम खान पर पैन कार्ड फर्जीवाड़ा मामले में सात-सात साल की सजा हो चुकी है, जिसे हाल ही में सत्र अदालत ने भी बरकरार रखा है। इस नए फैसले से उनकी कानूनी परेशानियां और बढ़ गई हैं। हालांकि सजा के खिलाफ वे उच्च अदालत में अपील कर सकते हैं। समाजवादी पार्टी के नेताओं ने इस फैसले को राजनीतिक साजिश बताया है, जबकि विपक्षी दलों ने इसे कानून का सम्मान बताया है। रामपुर में आजम खान के समर्थकों में मायूसी छाई हुई है।




















